Sunday, September 26, 2021

प्यार और कविता( Pyar Aur Kavita)

Pyar Aur Kavita
Pyar Aur Kavita
Image from: pexels.com



लिखूंगा मैं प्यार पर कविता..
नायक नायिका की गीता..
किसने किसको प्यार किया..
किसने प्यार में वफ़ा निभाई..

किसने किया प्यार में धोखा..
किसने किसको प्यार में मारा..
किसने दिल का सौदा किया..
प्यार के बहाने मिलते ही मौका..

किसने प्यार में वादा निभाया..
किसने अपनी जान गवाई..
किसने की बेवफाई..
किसने प्यार में लूटा..

किसने मतलब निकलते ही..
दिखाया प्रेमी को अंगूठा..
किसका प्यार था अनूठा..
किसने प्यार में हवस बुझाई..

किसने  प्यार की आश जगाई..
किसने जीवन संवार दिया..
किसने प्यार में सब वार दिया..
किसने ईश्वर की जगह दिलाई..

किसने दिल में बजाई रुबाई..
किसके गीत रोज गाते रहे..
किसे हरदम हम भाते रहे..
किसके नगमे  लुभाते रहे..

किसके सपने बुन कर..
रात गुजारी दिन ढला..
किसको चांद की आश से देखा..
किसका रूप बहुत पास से देखा..

किसके दिल में रोज झांका..
किससे खाया प्यार में झांसा..
किसके दिल में रहा प्यार हमेशा..
किसको हमने छुप छुप कर देखा..

किसकी चाहत जिंदगी में रंगत लाई..
किसकी याद में सारी जिंदगी बिताई..
किसके प्यार की छांव लगती प्यारी..
किसके बहुत पास जाने की तैयारी..

किसको देख दिल जोर से धड़का..
किसके लिए दिल में बना महल सा..
कौन है जो दिल को बहुत भाई..
कौन है जो मौत से  खींच लाई..

वही महबूबा है मेरी रूबाई..
जिसको देख मुस्कान आई..
कैसा अच्छा नसीब है मेरा..
ऐसी महबूबा जिंदगी में पाई..!! 


_जे पी एस बी 

कविता की विवेचना: 

प्यार और कविता/ Pyar Aur Kavita कविता प्यार के साथ कविता से नाता दर्शाती है जो कि सदियों पुराना है।

जब जब प्यार का इजहार बयान करने की जरूरत महसूस हुई प्रेमी ने कविता,  शायरी , गीत के माध्यम से बहुत सुंदर मन लुभावने अंदाज में प्रेम का व्याख्यान किया है।

प्रेम चाहे ईश्वर के प्रति हो, मां , बहिन ,पिता,दोस्त या और कोई रिश्ता हमेशा कविता के माध्यम से व्यक्त हुआ है।

प्रेमी प्रेमिका का प्रेम अनूठा होता है क्यों की यह किसी खून के रिश्ते का मोहताज नहीं और यह दो अंजान दिलों का सबसे गहरा रिश्ता बन जाता है।

भगवान से प्यार का रिश्ता व्यक्त करने के लिए मां मीरा जी और सूरदास जी ने कविता को माध्यम बनाया और अपना अनूठा प्रेम श्री कृष्णा के लिए जताया जो अमर हो गया।मां मीरा और सूरदास भी अमर हो गए।

महाकवि कालीदास जी ने मेघदूतम में भगवान शिव और पार्वती माता का  प्रेम महाकाव्य लिखकर व्यक्त किया।

प्रेम पर संसार भर में असंख्य कविताएं हर भाषा में लिखी गई गीत लिखे गए और लिखे जा रहे हैं , और भविष्य में भी प्यार कविता के माध्यम से व्यक्त किया जाता रहेगा।

" प्यार और कविता" कविता में प्यार का कविता से सदियों पुराना नाता है और अनंत काल तक रहेगा , कविता बिन प्यार अधूरा है, प्यार को अनुपम उचाइयो तक कविता शायरी ने की पहुंचाया है कविता प्यार की रूह है, खुशबू है।

कृपया कविता को पढ़े और शेयर करें।

... इति...
_जे पी एस बी
jpsb.blogspot.com










 


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