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Sunday, November 5, 2023

Papa ki yaad( पापा की याद)

Papa- पिता जी को श्रद्धांजलि-कविता 
I MISS YOU PAPA 
                                
Papa ki yaad
Papa ki yaad
Image from:pexels.com 


एक कमरा था..
पापा के ओज से..
भरा भरा सा..
आवाज आती थी..
कमरे से उनकी  ..
यदा कदा..
खाना पानी और दवा..
या सर दुखता है दबा..

ईश्वर की स्तुति..
उनकी रजा में ही..
संतुष्ट रहने की सहमती..
आज कमरे में..
है खामोशी खाली ..
जैसे खुशियो ने..
नज़र चुरा ली..
कान लगा कर..
सुनता हूं..
शायद बोलेंगे पापा..

कमरा पापा की..
दुनिया का प्रतीक था..
याद किया उन्होंने..
हर पल..
जो उनका अतीत था..
कुच्छ अच्छी बाते..
कुछ अनकही सच्ची बाते..
फ़िर से..
उठ खडे होने की चाह..
ईश मिलन का रास्ता..


आंखे जो उस कमरे में..
जहान देखती थी..
हमेशा सजग..
उम्मीद अनहोनी की..
वो आंखे बंद हो गई..
सदा के लिये..
दुखद अनहोनी थी..


ईश्वर की अराधना..
कुछ बिना मांग की..
वो करते थे प्राथना..
तेरा किया अच्छा लागे..
तेरा भाना सच्चा  लागे..
और थी ना कोई बात ना..

खामोशी और..
ईश्वर से सच्चा प्यार..
और किसी छे की..
उन्हें ना थी दरकार..
बीच बीच में..
स्वजनों को पुकार..
यही था उनका.. 
रोज का अखबार ..

अपना परिवार और..
अपनी बनाई..
पारिवारिक दुनिया..
बिखरा बिखरा सा..
दिखता था कुनबा ..
फिर इकठ्ठा करू..
तिनका तिनका..
शायद मन था उनका ..

एक दिन सबको..
ईश मिलन को..
जाना है..
जिस ईश्वर से..
प्रकट हुए..
उसी में समाना है..
मौत तो एक बहाना है..
पापा भी हुये जुदा..
कहा अनंत काल के लिये..
अलविदा अलविदा..!!

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कविता की विवेचना: -

पापा की याद/ Papa ki yaad कविता एक पुत्र की अपने पापा के प्रति एक वेदना भरी अश्रुपूरित श्रध्दांजली है.

उन्होंने अत्याधिक पीड़ा कष्ट बिना किसी शिकायत के सहे, एक कमरें एक बिस्तर में जीवन के दस वर्ष गुजारे और हमेशा ईश्वर का धन्यवाद ही किया और तेरा भाना सच्चा लागे कह कठिन जीवन जिया. 

काश जीते जी ईश्वर मिल जाता तो मौत को बीच में ना लाता, शायद मौत ही ईश्वर से मिलने की कड़ी है, सारी दुनिया से नाता तोड़ मौत ईश्वर से मिलाती है.

हम अपने के खोने को रोते हैं, मगर सारे जीव ईश्वर के होते हैं,और अपने प्रिय को वापिस बुलाता है, अंत में हम सबका ईश्वर से ही नाता है. 

"पापा की याद " दिल से निकले शब्द हैं जो पलके भिगोते हुये अपने जन्म दाता को दिल की गहराई से याद करते हैं.
जो पापा अनंत काल के लिये ईश्वर की आगोश में चले गये हैं. शायद हमारे लिये ईश्वर के चरणों में जगह बनाने, हमे भी तो वहीं जाना है...

Father's day पर..
पापा  को नम आंखों से श्रद्धांजलि! 


...इति...

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Tuesday, April 11, 2023

जन्म दिन तितली का (Janam din titalee ka)

जन्म दिन  - जन्म पर कविता       
Janam din titlee ka
Janam din titlee ka
Image from:pexels.com 

          

दिया की राज दुलारी ..
सबकी प्यारी अमृता ..
जीवन जिसका अमृत सा..
चंचल नटखट..
हँसे बोले चटपट..
सबको बना ले अपना..
सच हो उसका हर सपना..

तितली सी उडती फिरे..
सबका चित हरे..
जन्म दिन इस तितली का आया..
रंग बिरंगी खुशिया लाया..
चाँद सितारे खुशी से चमके..
खुशिया लाये भर भर के..

उपहारों सी होड़ सी आयी..
हँसी खुशी से स्वीकारे..
हमारी छोटी अमृता तायी..
चारो ओर खिले हैं फूल..
महके सारे गगन की धूल..

बहना मौसी ताई मासा..
नाना नानी भाई चाचा..
सारे दे जन्म दिन की बधाई ..
सारे चेहरों पर मुस्कान आई..
सारे मिल तेरा जन्म दिन मनाये..
यह दिन सालों बार बार आये..

मनोकामना जो भी हो तेरी..
अक्षरता हो पूरी ..
कोई भी उमंग ना रहे अधुरी..
तू रहे सदा हँसती खिलखिलाती ..
कभी ना आये..
तेरे चेहरे पर उदासी..

तितली सी भरे जीवन की उडारी..
गगन छुने की हो तैयारी..
हर कोई तेरे दीदार को तरसे..
धन दौलत सदा तुझ पर बरसे..
सबसे पाये तू स्नेह प्यार दुलार..
खुशियो का हो तुझे उपहार..

दिल की साफ़ मन की अच्छी..
अमृता तू है बहुत अच्छी बच्ची..
बड़ो का आशिष..
और छोटों का स्नेह प्यार..
देखो तेरे लिये केक है तैयार..
चलो जल्दी से काटो केक..
सबको खिलाओ तुकडा एक..

यह शुभ दिन सबको भाया है..
तेरे ओज तेज की माया है..
भगवान से ले लो आशिष..
झुका उनके क़दमों में अपना शीश ..
हो सदा तेरा भला..
आये तुझे जीवन की हर कला..
सफ़लता मिले आसमान से ऊंची..
जो भी तूने है मन में सोची..!!

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कविता की विवेचना:

जन्म दिन तीतली का /Janm din titalee ka कविता एक मासूम बच्ची के उमंगों और खुशियो से भरे जन्म दिन के शुभ और पावन अवसर पर लिखी गई है. 

बच्चे मन के सच्चे लगते सबको अच्छे और उन अच्छे बच्चो में भी कुछ खास बच्चे होते हैं जिनपर भगवान की अनुकंपा और विशेष आशीर्वाद होता है और ये बच्चे विशेष रूप से सबका मन मोह लेते हैं और उनसे विशेष लगाव हो जाता है उनमें से ही है  परी अमृता, जिसके जीवन में नाम अनुकूल जीवन अमृत भरा सा. 

सभी जानने वालों में अत्यंत लोकप्रिय चहेती सबकी प्यारी बेटी 
सभी बढ़ चढ कर अपना स्नेह प्यार और आशिष देना चाहते हैं. 
सभी बहुत ही उत्साह  चाव से इस प्यारी बच्ची का जन्म दिन मनाते हैं .ढेरों दुआएँ और शुभकामनाये देने की होड़ सी मची है. 

"जन्म दिन तीतली का " कविता लेखक ने दिल की गहराई से लिखी है, लेखक की भी वह बच्ची है, लेखक का आशिष स्नेह और दुआएँ दिल की तह से प्राकृतिक रूप से निकली हैं. 

और लेखक की पाठकों से विशेष प्रार्थना है की आप भी बच्ची के जन्म दिन के अवसर पर अपनी शुभ कामनाएँ आशिर्वाद दे.महसूस  करे  ,आपकी अपनी बच्ची में आपको अमृता का प्रतिबिंब दिखेगा और आपका दिया आशिष आपकी लाडली को भी लगेगा. 

लेखक शुभकामनाएँ और शुभ आशिष सभी पाठकों की बच्चियों के लिए भी है. 

कृपया कविता को पढे और शेयर करें. 

..इति..

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Thursday, February 16, 2023

चाँद का तुकडा (Chand ka tukda)

Chand        -जन्म दिन पर कविता               
Chand ka tukda
Chand ka tukda
Image from:with permission of Mr.Ajay Varma

आरुष बेटे..
तू परी लोक से..
हमारे घर आया..
साथ में ..
बहुत सारी..
खुशियां..
और चाँद तारे..
तोड़ लाया..

तू हमारा..
प्यारा फरिश्ता है..
हम अजय प्रियंका..
बहुत खुश हैं..
तेरा हमारे साथ..
बेटे का रिश्ता है..

आरुष मुझे तेरा..
पिता होने पर..
गर्व है..
आज तेरा..
जन्म दिन का..
पावन पर्व है..

मम्मी पापा..
बुआ मामा..
दादा दादी..
नानी नाना..
के आँखों का तू..
नूर है..
सबको तुझ पर..
नाज़ है गरूर है..

आरुष सब..
तुझ पर ढेर सारा..
प्यार बरसातें हैं..
हम सब तुझे..
जान से भी..
ज्यादा चाहते हैं..

दिलों में तूने..
हम सबके ..
बनाया है घर..
तू हमारे लिये है..
ईश्वर का वर ..
तेरा हमारे परिवार में..
अवतरित होना..
हम सब की जय है..
गर्वीला तेरा पिता..
अजय है..!! 

कविता की विवेचना:

 चांद का टुकड़ा / Chand ka tukda कविता श्री अजय वर्मा के सुपुत्र मास्टर आरुष वर्मा के दूसरे जन्म दिवस के अवसर पर लिखी गई है. 

मनमोहक मास्टर आरुष के जन्म दिन पर चारो तरफ खुशियां प्रफुल्लित हैं, आयुष के माता पिता, दादा दादी, नाना नानी, बुआ फूफा ,मामा और मित्र गण आनंद विभोर हैं .

आयुष के गर्वीले पिता अजय आयुष के आगमन से हमेशा जीतने वाले, कभी ना हारने वाले अजय हो गये हैं. 

ये दिन बार बार आये यू ही सब खुशियो से झूमे गायें ये लम्हे चिर स्मरणीय रहें यादे हर किसी से कहें. 

..इति..

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Sunday, May 15, 2022

हँसता हुआ नन्हा फरिश्ता( Hansta huwa nanha farista)

नन्हा फरिश्ता  - 1st Birthday New Born - कविता        
Hansta huwa nanha farista PC1
Hasta huwa  nanha farista
Image from:Image is approved private image 

तुम हँसो खुलकर..
खिलखिला कर..
मनमोहिनी गुलजार हँसी..
तू सदा ही..
एक सितारे सा..
चमके अमर रहे ..
तेरी हंसी..
सितारों में जा बसी..
सितारे भी मनाये खुशी..
ग़मों का करे..
खत्म किस्सा..
खुशियों को बनाये..
परिवार का हिस्सा..

तुम्हारी हंसी देख कर..
दुख डर से कहीं..
दुबक गये जाकर..
तुमने खुशियो से. 
मालामाल किया..
हमे हमारे घर आकर..
फरिश्ता है तू हमारा..
हम सब की.. 
आंख का तारा..

नन्हें बेटे तेरी..
मन लुभावनी हंसी ..
दिल को इतनी भायी..
मंत्र मुग्ध से हो गये सब..
दिल की गहरायों से..
हजारो दुआएँ..
स्वाभाविक निकल आयी..
तू है  एक चमकता..
सितारा ..
बना गौरव हमारा ..

तू  हमारा..
हँसता हुआ नन्हा फरिश्ता..
तुझ में ईश्वर का..
स्वरूप है दिखता ..
दर्शन पा तेरे..
मन तृप्त हो जाता है..
बार बार तुझे देखने..
और गले लगाने को..
दिल उकसाता है..
जैसे तुझसे हमारा..
जन्मों जन्मों का नाता है ..

खूब फ़ूलों से खिलौ..
फलो-फूलो, तेरी खुशबू से..
महक उठे सारा जहान ..
यू ही तुम खिलखिलाते ..
हंसते रहो..
सबके दिलों में बसते रहो..
हर दिल में हो घर तुम्हारा ..
सब कहे, सुंदर बेटा हमारा..

प्यार बरबस छलक जाये..
बारिस की तरह..
तुम पर बरस जाये..
बहुत सा प्यार दुलार..
जी चाहता है..
तुझ पर लुटाये ..
तू हमारी ओर देख..
खुश होय मुस्कुराए..
करे मनभावन अठखेलियाँ..
बहुत आनंद आया..
जब जब तुम्हें गोद लिया..
जैसे नन्हें फरिश्ते ने..
हमे खुशियो भरा वर दिया..!!

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Hansta huwa nanha farista PC2
Hansta huwa nanha farista PC2
Image from:Image is approved private image PC2

कविता की विवेचना:

हँसता हुआ नन्हा फरिश्ता/Hansta huwa nanha farishta ..
कविता एक बहुत प्यारे आलौकिक नन्हें फरिश्ते की अठखेलियाँ और उन्मुक्त हंसी पर मंत्र मुग्ध हो लेखक ने लिखी है. 

इस प्यारे नन्हें फरिश्ते के चेहरे से नजर नहीं हटती इतनी भोली प्यारी सूरत है उसकी. बरबस उसे बार गोद लेने को मन मचलता है, कितना भी खिला लो मन नहीं भरता है. 

भगवान कृष्ण कान्हा की तस्वीर उभर आती है, क्या भगवान कृष्ण हमारे घर पधारे है, हमारे तो खुशी से वारे न्यारे हैं. 

"हँसता हुआ नन्हा फरिश्ता" कविता स्वाभाविक सी बन आई है इस नन्हें फरिश्ते के सम्पर्क में आ के, मन मोह लिया,दिल मन आनंदित किया उदासी हंसी खुशी में बदल गयी भूल गया कि परेशानी क्या थी. नन्हें फरिश्ते के लिये ढेरों दुआएँ  हैं.

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...इति...

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Monday, May 9, 2022

मेरी मां (Meri maa)

             
Meri Maa
Meri Maa 
Image from:pexels.com 

मेरी " माँ " 
मेरी ईश्वर भगवान है..
मेरी जान लाखो बार..
माँ पर कुर्बान है..
मुझे इस पृथ्वी पर..
जन्म दिया..
मेरी हर बात को सुना..
ईश्वर के सुझाये..
कई बेटों में से..
तुमने मुझे चुना..

"माँ" मेरी खास है..
मेरे दिल के सदा पास है..
मैं माँ का रहा विशेष..
लाडला उसकी..
आँखों का तारा..
मुझे जरा सी तकलीफ में..
दिया हमेशा..
अपने स्नेह प्यार का..
बहुत मजबूत सहारा..

अचानक माँ को आया..
भगवान का बुलावा..
ना चाहते हुये भी..
ईश्वर के पास चली गई..
मेरी सितारें सी चमक..
माँ के साथ जाती रही..
यह शरीर रूपी लास..
पृथ्वी पर बाकी रही..

कई बार..
बार बार याद आती हो..
"माँ" 
मैने पुकारा..
क्या तुमने नहीं सुना..
तुमने बीच रास्ते..
मुझे छोड़..
भगवान को क्यों चुना..
क्या भगवान के आगे..
तुम्हारी इच्छा ना चली..
माँ तुमने जरूर..
मांगी होगी ईश्वर से..
मेरी भली..


माँ तुम मिलोगी ना..
एक बार फिर..
तुम्हें याद कर करके..
आँखों में .. 
भर आता है नीर ..
माँ सदा..
अपने दिल में..
चरणों में मुझे रखना..
अनंत जन्मों तक ना खोना..
हर जन्म मेरी "माँ "होना..!!

_Jpsb 

कविता की विवेचना: 

मेरी माँ /Meri Maa कविता में लेखक अपनी माँ को बड़ी सिद्दत से  याद करता है, जो समय पहले ईश्वर के बुलावे पर स्वर्ग सिधार चुकी है. 

लेखक अपनी "माँ "से बेइंतहा प्यार करता है, मगर माँ अब सामने प्रत्यश रूप में नहीं है पर लेखक हमेशा माँ को अपने पास पाता है. 

इंसान का सब कुछ छिन जाये मगर माँ से कभी ना जुदा हो, माँ के बगैर बेटी बेटे का नूर चला जाता है और वो एक जिंदा लाश रह जाता है. 

वो बहुत भाग्यशाली हैं जिनकी माँ लंबी उम्र तक साथ रहती हैं, उन्हें संपूर्ण जीवन अमृत नसीब होता है, माँ का आशीर्वाद और भाग्य हमेशा जीवन में आयी बाधाओं को आसानी से दूर करता है. 

"मेरी माँ " कविता में माँ लेखक के लिए शक्ति पुंज है, आशीर्वाद है, छत्रछाया है, रक्षा कवच है, उत्साह, हेमंत है, माँ जीवन संचार है, माँ बिन जीवन बेकार है, माँ जीने की प्रेरणा है. 

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सभी को माँ का प्यार और आशीर्वाद सदेव मिले. 

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Friday, April 15, 2022

तेरे नाम (Tere Naam)

           
Tere naam
Tere naam 
Image from:pexels.com 


किया मैंने सब कुछ..
निसावर पिया तेरे नाम..
बाबुल का घर छोड़ा..
हर रिश्ता बंधन तोड़ा..
तेरे नाम..

हो गए  सभी पराये..
एक दम से..
जैसे तुम मेरी जिन्दगी में..
आये ऐसे छाये..
किया मैंने तन मन बदन..
तेरे नाम..

अपनी पहचान..
अपना नाम भी  छोड़ा..
रखा उपनाम..
तेरे नाम..
माथे पर बिंदिया..
मांग में सिंदूर..
तेरे नाम..

पाव में बिछीया ..
गले में मंगल सूत्र..
तेरे नाम..
नाक में  नथनी..
सर पर चूनर..
आँखों में काजल ..
तेरे नाम..

किया छोला सिंगार..
सारे वर्त त्योहार..
तेरे नाम..
माँ बनी मैं..
मेरी सन्तान..
तेरे नाम..
अस्तित्त्व कुछ भी नहीं मेरा..
रोम रोम मेरा निसावर ..
तेरे नाम..

जब से आयी मेरी डोली..
तेरे आँगन..
मेरी सारी पहचान..
तेरे नाम..
अब अर्थी में जाऊँगी श्मशान..
मुझे है गुमान..
मेरी अस्थियों की राख..
तेरे नाम..

याद रखना मुझे..
अपनी सांसो धडकनो में सदा..
मेरी आत्मा मेरा साया..
तेरे नाम..!!


_JPSB 

कविता की  विवेचना: 

तेरे नाम/Tere naam कविता भारतीय संस्कृति में जब लडकी विवाह करके अपने पति के घर यानी ससुराल आती है वो सारे रिश्ते तोड़ के एक नये रिश्ते को समर्पित हो जाती है सदा के लिये. 

शादी के बाद उसका सब कुछ उसके पति के नाम हो जाता है, उसका  सारा अस्तित्त्व उसके पति के इर्द गिर्द घूमता है.

उसका नाम बदल कर पति का सरनेम लग जाता है, पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती है, पति के नाक मांग भरती है, गले में मंगल सूत्र, पाव में 
बिछया पहनती है. 

जब वो माँ बनतीं है उसकी सन्तान  पति के नाम होती है, उसके बाबुल के घर से उसकी डोली उठते ही उसकी सारी दुनिया बदल जाती है, उसके पहले के खास रिश्ते अब पति के  सामने आम  हो जाते हैं, सिर्फ पति का रिश्ता खास हो जाता है. 

यहां तक उसके मरने पर उसकी अर्थी ससुराल से  पति के घर से उठती है और उसकी चिता की राख पति के नाम हो जाती है. 

"तेरे नाम "कविता पूरी तरह  भारतीय संस्कृति की बहू को समर्पित है जो कि मरने के बाद भी जन्मों का वचन और वादा करके जाती है, उसकी आत्मा और उसका साया हमेशा पति के साथ रहता है. 

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...इति...

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Monday, February 21, 2022

नन्ही परी ( Nanhi Pari)

          
Nanhi Pari
Nanhi Pari 
Image from: pexels.com

नन्हीं सी परी उतरी..
हमारे द्वार गगन से..
हम सब सम्मोहित हैं..
देख उसे मगन से..

मनमोहक स्वरूप उसका..
नन्हीं सी काया..
देख उसके रंग रूप को..
दिल को बहुत आनंद आया..

माता पिता बनने का..
दिव्य सौभाग्य..
शुभ - भव्य ने पाया..
नानी - नाना बनकर कर..
अन - सन ने खूब..
आनन्द लुफ्त उठाया..

दादी - दादा, मौसी - मामा..
भी खूब झूमे शान से..
नन्हीं परी ने पूरे किए..
जो दिलों में अरमान थे..
हमारी परी हमारी परी..
कह कर झूमे हैरान से ..

नन्हीं परी ने जन्मते ही..
नन्हे नन्हे हाथों से..
उंगली मां की थामी है..
गुडिया बहुत ही ..
सौभाग्यवती नामी है..

भारत की परी आ गई..
उड़कर अमरीका..
कितनी शुभ घड़ी..
सुनहरा सा दिन था ..

खुशियों भरा माहौल..
हमारे आंगन में छाया ..
भारत का रिश्ता जोड़ रही..
अमेरिका से नन्हीं सी काया..

लक्ष्मी स्वरूप है..
जिसके दर्शन को ..
हर कोई तरसे..
जहां पड़े कदम इस परी के..
वहां वहां खूब धन बरसे..

हम सब परिवार वाले..
अपनी नन्हीं परी को..
दिन रात लुभाएंगे..
खेलेंगे उसके साथ..
नई नई लोरियां गा गा के..
उसको खूब खिलाएंगे..
प्यार ढेर सारा बरसाएंगे..!! 

_जे पी एस बी 


         
Nanhi Pari pc2
Nanhi Pari pc2
Image:taken approval 


कविता की विवेचना:

नन्हीं परी/ Nanhi Pari कविता हकीकत में एक नन्हीं सी परी की पृथ्वी पर अवतरित होने की शुभ घड़ी की सच्ची कहानी है।

आलौकिक रूप रंग जैसा कविता में वर्णित है से भी सुंदर  नन्हीं परी उसके नए नवेले माता पिता की मुराद पूरी करती है, और सारे नाते रिश्तेदारों को भी खुशी सुख से आनंदित करती है।

सब परी के आगमन की खुशी में झूम रहे हैं एक दूजे को बधाइयां मिठाईयां दे हांथ चूम रहे हैं।

खुशी की खबर सब दूर पहुचाई जा रही है, फोन मोबाइल वीडियो काल लगाई जा रही है ।

तस्वीर परी सी गुडिया की मोबाइल व्हाट्स एप पर पाकर सब खुश हो रहे हैं, अनेक बार तस्वीर को देख रहे हैं , मन ही नही भरता।

"नन्हीं परी" कविता सौभाग्यशाली गुडिया को गरिमामई ईश्वर का आशीर्वाद है, बहुत यश धन्य धान्य से प्रफूलित हो पूरे परिवार का नाम रोशन करे।

... इति...
_जे पी एस बी
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Friday, January 14, 2022

बेटे का पिता होना(Bete ka pita hona)

     
Bete ka pita hona PC 1
Bete ka pita hona 
Image from: pexels.com


बन के पिता ..
अपने बचपन की..
कहानी याद आई..
मां की गोद ..
सुहानी याद आई..

अपने बचपन में..
वो बिन वजह हंसना ..
मचलना ,जिद कर..
खिलोने लेना..
नखरे कर के खाना..
बिन वजह ..
मुंह बनाना..
पढ़ाई से जी चुराना..

मेरा बचपन ..
चल चित्र सा..
आ गया सामने..
मैं तो अभी भी बच्चा हूं..
मेरे मां बाप के सामने..

ताजुब होता है..
जब अपने नन्हे..
बेटे को देखता हूं..
लगा हूं मैं..
खुद को पिता मानने..

काटता हूं ..
खुद को चिकोटी..
जब जब अपने बचपन में..
चला जाता हूं..
प्यारी मनोहर कहानियों में..
गोता लगाया हूं..

अपने आप को..
धन्य पाता हूं..
अपने मां बाप का..
लाडला बेटा हो कर..
अब मैं पिता बन गया..
एक नन्हे लाडले ..
प्यारे बेटे का..
अब पिता का ..
फर्ज निभाऊंगा..

मै पुछता हुं खुद से ..
क्या मैं बेटे का फर्ज..
निभाता हूं..
शायद थोड़ा लापरवाह हूं..
अब लापरवाह से..
समझदार बन जाऊंगा..
पिता के साथ साथ..
बेटे का फर्ज भी निभाऊंगा..

अठखेलियां खेलूंगा..
अपने बेटे के साथ..
चूमूंगा उसके..
नन्हे नन्हे हाथ..
एक नया अनोखा ..
स्नेह प्यार जागेगा..
मेरा दिल..
बेटे की खुशियों के लिए..
दिन रात भागेगा..

परिवार का बनूगा मैं..
समझदार मुखिया..
बांटूंगा कुटुंब में..
दिन रात खुशियां..
जितना भी पहले..
मां बाप से..
सुख चैन लिया..
कहूंगा उनसे..
अब छोड़ो सब चिंता..
मैं बड़ा हो गया..
अपने पैरों पर..
खड़ा हो गया हूं..

अब परिवार की..
गाड़ी मैं खिचूंगा..
पूरे परिवार को..
खुशियों से सिंचुगा..
इसमें अब मुझे..
बहुत खुशी मिलती है..
दिल प्रफुलित होता है..

मेरा सारा परिवार..
प्रेम सागर में..
लगा रहा गोता है..
डूब कुटुंब में..
मैं दुनिया की..
सारी खुशियां पाता हूं..
एक मुकमल..
बेटा और पिता..
बन जाता हूं..!! 
         
Bete ka pita hona PC 2
Mai pita ban gaya PC 2
Image From:pexels.com


        

_जे पी एस पी 

कविता की विवेचना: बेटे का पिता होना/ Bete ka pita hona

मैं पिता बन गया अर्थात "बेटे का पिता होना" कविता एक लाडले  बेटे की कहानी है, जो बहुत लाड प्यार में पला और जब खुद बाप बना तो उसे नए नए एहसास हुए , उन एहसासों का वर्णन कविता में है।

लाडला बेटा थोड़ा लापरवाह हो गया था ज्यादा लाड प्यार के कारण, जवान हुआ शादी हुई और उसको बेटा हुआ। 

बेटे को बेटा होने के बाद यानी बेटे का बाप बनने के बाद , अचानक बेटे को लगा कि वह बहुत बड़ा और समझदार हो गया है, क्यों कि वह खुद को बच्चा ही समझता था और पूरी तरह मां बाप पर ही निर्भर रहता था।

पूरे परिवार ने घर में नए नही सदस्य आने की भरपूर खुशियां मनाई, बेटे के मां बाप अपने नन्हे पोते को गोद में पाकर बहुत खुश हुए।

बेटा भी आचार्य से अपने नन्हे पुत्र को निहारता रहा। और सोचता कि कितनी जल्दी वो बड़ा हो गया और एक बेटे से बाप बन गया। 

अभी जैसे कुछ दिन पहिले ही तो वो मां की गोद में खेलता था ,समय कब गुजार गया पता ही न चला।

बेटे की नजरों के सामने उसका सारा बचपन चल चित्र की भांति सामने घूमने लगा , बेटा अपने बचपन की मीठी सुहानी यादों में खो गया वोह अपने बेटे में आईने की तरह अपना बचपन देखने लगा एक एक यादें बहुत भावुक थी।

मन ही मन प्राण किया कि मैं भी अपने बेटे को अपर खुशियां प्यार दूंगा जैसा मेरे माता पिता ने मुझे दी हैं।

उसे अपनी कई नादानियां भी याद हो आई जब जिद की थी या माता पिता को लाड में आकर सताया था ।

 बेटे ने प्रण किया कि अब मैं एक जुम्मेदार पिता और जुम्मेदार बेटा बनूंगा , सारी लापरवाहिया छोड़ कर घर की जुम्मेवारी  ऊपर लूंगा और अपने माता पिता को अपार सुख दूंगा , बेटे को भरपूर लाड प्यार और संरक्षण दूंगा और एक बेहतरीन इंसान बनाऊंगा।

"बेटे का पिता होना" कविता एक अल्हड़ बेटे को समझदार और जुम्मेदार पिता और आदर्श बेटे में परवर्तित होने की मार्मिक कहानी कविता के रूप में है।

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_जे पी एस बी
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Saturday, October 2, 2021

मां ( Maa)

Maa
Maa 
Image from: pexels.com



" मां "तू अपने बच्चो को..
सिसकता छोड़ कर..
जाने किस लोक में चली गई..
तेरे जाते ही हमारा बचपन रूल गया..
आंसू ना रुके एक पल भी..
मन हमारा आंसुओ से धूल गया..

हर एक पल मन ने दोहराया..
कि तुम लोट आओगी..
हमारे माथे को प्यार से सहलायोगी..
हमे न मालूम था बचपन में..
कि वहां से लोट फिर कोई नही आता..
टूट जाता है सारा रिश्ता नाता..

जब जब बुरा हुआ हमारे साथ..
तुम बहुत ज्यादा याद आई..
अकेले में आंसुओं की झड़ी लगाई..
जब जब अच्छा हुआ तब भी..
तुम्हारे लिए दिल बहुत धड़का..
मन तरसा ,आंखे नम हुई..

काश तुम होती ऐसा कई बार सोचा..
तुम्हारे ना होने पर..
अपनी किस्मत को कई बार कोसा..

मां अपने बच्चो की..
धड़कने खूब पहचानती है..
अपनी जान से भी कही ज्यादा..
अपने लालों को मानती है..

मां ने ही हर कीमत पर..
अपने बच्चो के शौंक पूरे किए हैं..
मां हमे याद है तूने रातों जाग..
हमारे लिए दूसरों के कपड़े सीए थे..
उन पैसों से हमें उपहार दिए थे..

याद आता है एक एक पल..
तुम्हारे लाड में गुजारा हुआ..
तुम्हारे मुंह से निकलती थी..
हर वक्त हमारे लिए दुवाएं..

ना जाने अचानक हम पर क्यों..
ईश्वर ने कहर बरसाया..
छीन लिया हम बच्चो के सिर से..
तुम्हारा गहरा घना छाया..
तडफे रोए तरसे किसी ने ना सुनी..
अनाथ हो गए कभी पूरी नींद न सोए..

आज जब मैं भी पहुंच गया..
उम्र के आखिरी पड़ाव पर..
मिलोगी फिर तुम मुझे जरूर..
ईश्वर से सच्चे जुड़ाव पर..

इंतजार तुमसे मिलने का..
बहुत ज्यादा बे करार करता है..
थाम लेती है मां हांथ ..
जब उसका बच्चा मरता है..
मां भगवान है..
मां ईश्वर का दूसरा नाम है..!! 



_जे पी एस बी 

कविता की विवेचना: 

मां/ Maa कविता मां के बच्चो से अनूठे पवित्रतम रिश्ते के बारे में है , जब ईश्वर समय से पहले उन बच्चो की मां को अपने पास बुला लेता है।

मां को भगवान ने अपने से भी ऊंचा दर्जा दिया है, यशोदा मां और भगवान कृष्ण का प्यार जग प्रसिद्ध है।
मां पार्वती का अपने पुत्र श्री गणेश से प्यार ही था जिसने भगवान शंकर को श्री गणेश को पुनः जीवित करने को मजबूर किया था।

 मां के अवतार पर कई अनमोल सुंदर गीत लिखे गए, जैसे: जिसको नही देखा हमने कभी ,हे मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी..
दूसरा गीत: मां तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है, प्यारी प्यारी है ओ मां..

कविता में नायक और उसके भाई बहिन अपनी स्वर्गवासी मां को को शिद्दत से याद करते हैं जो कि उनके बचपन में ही भगवान के घर विदा हो गई थीं।

मां के जाने के बाद बच्चो ने मृत्यु तुल्य तकलीफे सही जो कि शब्दो में बयान नही की जा सकती। मां की जगह कोई नही ले सकता ,ईश्वर भी नही , मां को ईश्वर ने खुद अपने से भी ऊपर बनाया है, और शक्तियां दी है कि मां अपने बच्चो की परवरिश कर सके।

"मां" कविता में मां में ईश्वर के दर्शन जो कि स्वयं भगवान का मां को वरदान है,मगर असमय वह मां रूपी ईश्वर बच्चो से भगवान ही ले ले तो बच्चो का जीवन नरक हो जाता है।मां कविता मां को उसके बच्चो की ओर से की श्रद्धांजलि है।

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_जे पी एस बी
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Saturday, September 11, 2021

नन्हा फरिश्ता ( Nanha Farista)


Nanha Farista
Nanha Farista
Image from : pixabay.com



ओ नन्हे से फरिश्ते..
तू आया मुट्ठी भींचे..
मुट्ठी में हमारी तकदीर लाया..
कोमल सी सुंदर तेरी काया..
तू सबके मन को भाया..
चमक उठा हर मुखड़ा खुशी से..
जब तू दिव्य मुस्कान मुसकाया..
तेरे स्वागत में..
खुले दरवाजे हमारे दिल के
तुमसे दिल का नाता..
हम सबको है लुभाता..
ईश्वर का अनमोल वरदान तू..
आया हमारे हिस्से ..
ओ नन्हे से फरिश्ते..
सौभाग हमारा..
जुड़े जो तुमसे रिश्ते..
झूमे हम खुशी से..
ईश्वर का प्यार तू..
जो हम पर बरसाया..
भाग्य के दरवाजे खुले..
जब से तू आया..
बन गए कई रिश्ते..
मां बाबा, अजी अजोबा..
नाना नानी, मामी मामा..
काका काकी,दीदी दादा..
सबने किया मुस्करा के..
स्नेह प्यार का वादा..
ओ नन्हे से फरिश्ते..
तुमसे अपना नाता..
तुमसे लाड के रिश्ते..
खेलेंगे तुमसे ..
सुबह शाम..
 सुनाएंगे तुम्हे गुड्डा गुड्डी के..
किस्से..
कभी लोरी सुनाएंगे..
कभी कोई गीत पुराना..
तू है हमारा कान्हा..!!
#

_ जे पी एस बी  
Nanha farista pc2
Nanha farista pc2
Image:taken approval from image ownwer


कविता की विवेचना:

नन्हा फरिश्ता/ Nanha Farista कविता नए आए उस मेहमान के स्वागत में है जो दूसरे लोक का फरिश्ता है और हमारे लोक में आया है। 

नया जन्म लेने वाला हर बच्चा उस परिवार के लिए फरिश्ता ही है। वो मुठिया बंद करके उन बंद मुठिया में परिवार की तकदीर लाता है।

पूरा परिवार फरिस्ते की आगमन की खुशियों में झूम जाता है। उसके रूप रंग की प्रशंसा करता है और नन्हे फरिश्ते की निर्मल मधुर मुस्कान पर मुग्ध हो जाता है।सबको लगता है कि फरिश्ता सबके लिए कुछ न कुछ किस्मत लाया है क्यों की वह ताजा ताजा भगवान से मिल कर आया है।

नन्हा फरिश्ता भी मंद मंद मुस्कान से उनको तृप्त कर देता है और विश्वाश दिला देता है की वो उनके लिए खास भगवान का आशीर्वाद लेकर आया है।

हर किसी का मन नन्हे फरिश्ते से खेलने का मन होता है और खेलकर एक अनोखी खुशी हासिल होती है।

 मां का तो वो आंख का तारा है, मां एक पल भी अपने फरिश्ते को आखों से ओझल नहीं होने देती उसकी हर खुशी का पल पल ध्यान रखती है ,उसे तो जैसे सारे जहां की दौलत भी कही ज्यादा सब कुछ मिल गया है।

 पिता भी दिल में अरमान और गुमान लिए घूमता है कि यह फरिश्ता मेरा बेटा है मुझ से बहुत ही खास नाता है।

"नन्हा फरिश्ता " कविता में फरिश्ते के जादुई मोहपाश में आकर लिखी गई कविता है, अपने आस पास नन्हे फरिश्ते को देखे और उसे बहुत प्यार दें।

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_जे पी एस बी 
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Saturday, August 7, 2021

नन्हा मेहमान( Nanha Mehman)

Nanha Mehman
Nanha Mehman
Image From: pexels.com



ऊपर वाले ने हमारे परिवार की..
 खुशियों भरी कहानी लिखी है..
नए नन्हे मेहमान के ..
आने की भविष्य वाणी लिखी है..

यह खुशखबरी सुनकर ..
दिल में खुशी से गर्मी छाई है..
नन्हे के स्वागत की तैयारी में हमने..
 खरीदे खिलोने नन्हे कपड़े मोजे..
और खरीदी  छोटी सी रजाई है..

उत्साह नई उमंग से ..
सारा परिवार सराबोर है..
हमारे परिवार का नया नन्हा मेंबर..
बड़ा मोहना सा चितचोर है..

होगा वो मुकदर का सिकंदर..
हम सबकी जिंदगी में वंडर..
हमारी आंखों का तारा..
जिसकी नन्ही मुस्कान पे..
हमने अपना सबकुछ वारा..

चंदा सा वो होगा प्यारा..
हमारी गोद में खेलेगा आन से..
हम सब खेलेंग उसके साथ शान से..
वो कभी मुस्कुराएगा खिलखिलाएगा..
हमारा मन जीतेगा और हंसाएगा..

हमारी मुराद पूरी की ईश्वर ने..
सोहने से नन्हे से खुशियां भर दी घर में..
हर्सोऊलास से भरा भरा हमारा आंगन..
प्रफुलित खिला खिला दिल और सबका मन..
खुशियां और बढ़े जहां जहां नन्हे पग पड़े..!!



Upar wale ne hamare parivar ki..
Khushiyon bhari kahani likhi hai..
Naye mehaman ke ..
aane ki bhavishyavani likhi hai..

Yah khushkhabri sunkar..
Dil me khushi ki garmi chhayi hai..
Nanhe ke swagat ki taiyari me hamne..
Kharide khilone nanhe kapde mouje..
Aur kharidi chhoti si razai hai..

Utsah nai umang se..
Sara parivar sarabore hai..
Hamare parivar ka naya nanha member..
Bada mohna sa chitchor hai..

Hoga woh mukaddar ka sikander..
Ham sabki jindgi main wonder..
Hamari ankhon ka tara..
Jiski nanhi muskan pe ..
Hamne apna sab kuchh wara..

Chanda sa woh hoga pyara..
Hamari goad me khelega aan se..
Ham sab khelenge uske sath shan se..
Woh kabhi muskurayega khilkhilayega..
Hamara man jeet lega aur hasanyega..

Hamari murad puri ki ishwar ne..
Sohne se nanhe se ..
khusiyan bhar di ghar main..
Harsoulas se bhara bhara hamara angan..
Prafulit khila khila sabka mann..
Khusiyan aur badhen jaha jaha nanhe pag paden..!!


_जे पी एस बी

कविता की विवेचना:

नन्हा मेहमान/ Nanha Mehman कविता न्यू बोर्न बेबी
के बारे में है , जब नन्हे मेहमान के आने की खुशखबरी मिलती है तो सारा परिवार खुशी से झूम जाता है।

नन्हें मेहमान के स्वागत की तैयारिया जोर शोर से शुरू हो जाती हैं, खिलौनों नन्हे कपड़े झूला रजाई बड़े उत्साह और लगन शौंक से खरीदी जाती है, सब खरीदारी में प्यार की गर्माहट होती है।

खुशियां मनाने के लिए फंक्शन की तैयारी,  भारत  में गोद भराई की रस्म होती है , एक मीडियम फंक्शन किया जाता इसमें लड़के लड़की की तरफ के सब रिश्तेदार शामिल होते हैं और मां बनने वाली बहु को आशीर्वाद और उपहार देते हैं , फिर सारे रिश्तेदार साथ मिलकर प्रीति भोज करते हैं । इस प्रकार सब करीबी रिश्तेदार इस खुशी के हिसेदार हो जाते हैं।

" नन्हा मेहमान" कविता में इन्ही सब खुशियां का जिक्र किया गया है ।
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_जे पी एस बी
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