Guru Gobind Singh -वीर रस कविता
धन धन गुरु गोविंद सिंह,
धर्म की खातिर
वार दिया परिवार,
मात-पिता और पुत्र चार।
बाल दिवस बन गया ..
बड़ा पर्व शहीदी...
मांगी थी जब धर्म आज़ादी,
नन्हे तन, पर साहस विशाल,
जिनसे काँप उठा काल
चार साहिबज़ादे अमर कहानी,
धर्म की मशाल, शौर्य की निशानी,
खेल-खेल में दे दी कुर्बानी
सर उठा आजादी की ठानी
बाबा अजीत, जुझार—रण में लड़े,
हँसते-हँसते दुश्मन से जुझ पड़े,
बाबा ज़ोरावर, फतेह—बच्चे थे,
पर इरादे और धर्म के- पके थे,
दीवारों में चिनवा लिया,
पर विश्वास न छोड़ा,
“वाहेगुरु” का नाम लिया,
वज़ीरखान का दंभ तोड़ा,
इतिहास में हीरे सा जोड़ा।
उनकी कुर्बानी की याद ,
बाल दिवस मना रहें आज,
बचपन उम्र नहीं पहचान,
साहस, सत्य और बलिदान,
विशाल अकाल थे उन
उन बाल हृदयों के संकल्प,
धर्म, न्याय और मानवता थे
उनके जीवन के आदर्श।
आओ प्रण लें इस पावन दिन,
साहिबज़ादों की राह चलें,
भय से नहीं, निडर जियें,
अन्याय के आगे अडिग रहें।
मोती राम मेहरा जी..
और याद आता उनका परिवार,
जो उनका पिलाया दुध
अमृत हो गया
शहीद हुआ उनका सारा परिवार
दीवान टोडर मल ने
बिछायी धरती पर सोने की मोहरे
धरती बना दी अनमोल
साहिब जादौ के आगे..
दोलत का क्या मोल .
धन धन गुरु गोविंद सिंह,
धन धन चारों लाल,
माता गुज़री का हृदय विशाल
जिनकी शहादत से रोशन है,
भारत में सत्य और धर्म की मशाल..
कविता की विवेचना:
धन धन गुरु गोविंद सिंह/ Dhan dhan Guru Gobind singh कविता गुरु जी और उनके परिवार के चरणों में समर्पित है.
ये अलौकिक शहादत है जो धर्म और सत्य के लिये दी गई, उनकी लड़ाई किसी राज्य धन दौलत के लिए नहीं थी, इस धरती पर धर्म और सत्य की विजय के लिये थी.
धर्म चाहे किसका भी हो थोपा नहीं जा सकता और सत्य जो अटल है, कभी मिटाया नहीं जा सकता.
परमात्मा एक है और वो सबका है, किसी एक का नहीं चाहे उसे किसी रूप में माना जाये यही अटल सत्य है.
औरंगजेब इस सत्य को भूल खुद को ईश्वर की सता से ऊपर मान
बैठा और लोगों पर जुल्म करने लगा ,जो धर्म वो कहे मानों गुरु जी
की उनकी लडाई इसी बात को लेकर थी.
जो पाँचवें गुरू श्री अर्जुन देव जी की शहादत से शुरू हुयी और गुरू तेग बहादुर जी, गुरु जी के चार पुत्र चार साहिब जादे श्री बाबा अजीत सिंह, श्री बाबा जुझार सिंह, श्री बाबा जोरावर सिंह, श्री बाबा फतेह सिंह और गुरु जी की माता श्री गुजर कौर जी की शहीदी के बाद भी जारी रही रही.
श्री गुरू तेग बहादुर जी साथ उनके अनुयायी भाई मती दास(आरी से काटा गया), भाई सती दास(रुई में लपेट कर जिन्दा जला दिया गया),भाई दयाळा जी(पानी में जिंदा उबाल दिया गया) को शहीद किया गया.
गुरू गोविंद सिंह जी को उनके 40 सिखों के साथ मुग़लों की दस लाख सेना ने घेर लिया गया, गुरू जी ने पाँच पांच करके सिखों को उस युद्ध के में किले से भेजा उनमें उनके दो बड़े साहिब जादे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह भी थे, दस लाख के सेना से 40 सिख योद्धा लडे ,सवा लाख से एक लडा.
उनके छोटे दो साहिब जादे बाबा फतेह सिंह और बाबा जोरावर सिंह और गुरु जी की माता जी माता गुज़र कौर उनसे सिरसा नदी पार करते समय बाढ़ के कारण उनसे बिसर गये, जिन्हें गुरू ज़ी का रसोइया गांगुराम अपने घर ले गया मगर उसने कुछ धन के लालच में मुगल सेना से गिरफ्तार करवा दिया, जिन्हें दिवार में जिन्दा चिनवा दिया गया माता गुज़री जी की भी क़ैद मे शहादत हो गई.
कैद के दौरान साहिब जादौ को श्री मोती राम मेहरा जी ने चोरी से दूध पिलाया जो मुगलों को पता चल गया मोती राम मेहरा जी और उनके सारे परिवार को कोल्हू मे पीस कर शहीद कर दिया गया.
साहिब जादौ और माता गुज़री जी के अंतिम संस्कार से रोका गया, संस्कार की जमीन के लिये दीवान टोडर मल जी ने खड़ी सोने की मोहरे ज़मीन पर बिछायी तब संस्कार की जमीन दी गई.
बाद में धर्म के लिये असंख्य सिख शहीद किये गये, भाई तारू सिंह जी ने अपनी खोपड़ी उतरवा ली पर धर्म नहीं बदला ,श्री बन्दा सिंह बहादुर और उनके 70 सिखों को शहीद किया गया .
और उनके पांच साल के पुत्र श्री अजय सिंह जी को बन्दा सिंह बहादुर जी के सामने श्री अजय सिंह जी का दिल निकाल कर श्री बन्दा सिंह बहादुर जी के मुह में दिया गया और शहीद किया गया बाद मे बन्दा जी बहादुर जी को बहुत ज्यादा यातना देने के बाद शहीद किया गया.
"धन धन गुरु गोविंद सिंह " कविता में श्री गुरू गोविंद सिंह जी को धर्म और सत्य के लिये अपने परिवार को शहीदी के लिये कोटी कोटी नमन की कोशिश है, जो अलौकिक है जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता फिर भी कोशिश है.
कृपया इस शहादत को अपने बच्चों को बताये और उन्हें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे.
...इति
Jpsb blog
jpsb.blogspot.com
Author is a member of SWA Mumbai
Copyright of poem is reserved