Sunday, February 22, 2026

काले अंग्रेज (Kaale Angrej)

Kaale Angrej- Aazadi ki Politics
Kaale Angrej
Kaale Angrej 
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अंग्रेज यानि गोरे..
गिनती में थे थोड़े..
तब भी भारत पर..
राज कर गये..
भारतीय क्यों इनसे..
डर गये जीते जी मर गये..

भारत को अपना..
गुलाम बनाया..
हमारे लोगों द्वारा ही..
हम पर चाबुक चलाया..
कुछ ग़द्दार जो इनसे मिले..
भारतीयों पर अत्याचारों के..
जारी रहे सिलसिले..

क्या हम बुजदिल थे ..
या थे स्वार्थी निकम्मे..
कभी मुगल तो कभी अंग्रेज..
हमे झुकाते रहे..
हम पर हुकूम चलाते रहे..
हमारे देश पर अपना ..
परचम लहराते रहे ..

और हमने माना उन्हें..
अपना माई बाप..
अपने पर ही शासन करने में..
दिया उनका साथ..
गुलामी को गौरव माना..
अपने अन्दर के गद्दारों को..
नहीं पहचाना..

सालों लंबी गुलामी..
क्यों सही, क्यों कोई..
जिन्दा साँस ना रही..
गुलामी में सुविधा तलाश ली..
घुट्टी घुट्टी साँस ली..
यही हमारी आदत बनी..
जो अब भी जारी है..

कुछ बहादुर जागे भी थे..
राणा शिवा जी के..
मुगलों को खदेड़ने के..
पक्के इरादे थे..
मगर कुछ ग़द्दार..
जनता सोई रही बेख़बर..
तो बहादुरी भी रही बेअसर..

गुरु तेगबहादुर और..
गुरु गोबिंद सिंह ने..
वार दिया परिवार..
चार साहिब जादे..
माता गुज़री की शहीदी..
मुग़लों की कब्र की..
आखिरी कील थी..

उत्तर भारत में..
बंदा सिंह बहादुर ने..
मुगलों को सबक सिखाया था..
पंजाब में अपना ..
राज बनाया था..
मराठा राज शिवा जी ने..
भगवा फहराया था..

औरंगजेब महाराष्ट्र में..
डफन हुया, मुघल राज..
तभी खत्म हुआ..
किसी तरह मुगलों से..
पीछा छुटा तो..
अंग्रेजों ने गाड़ दीया खूँटा..
दो सौ साल फिर..
अंग्रेजों ने जमकर लूटा..

बुजदिली और थी गद्दारी..
अंग्रेजो की गुलामी स्वीकारी..
अपना गिरेबान अंग्रेजो को..
पेश किया, गुलाम फिर..
ये देश किया, जमीर क्यों..
सोता रहा, देश सिसक सिसक..
रोता रहा, हमारा तिरंगा..
यूनियन जैक का भार..
ढोता रहा, मान खोता रहा..

1857 में ग़ुलामी का..
एहसास हुआ हमारे..
हमारे वीरों को तब..
मंगल पांडे ने सेना में..
चिनगारी सुलगाई थी..
और वीरों के साथ..
झाँसी वाली रानी ने भी..
जान की बाजी लगायी थी..

एक बार फिर जोश से..
वीर भारतीय जागे थे..
करतार सिंह साराभा ने..
आज़ादी की अणख जगायी..
छोटी उम्र में शहीदी पायी..
फिर और वीर आये आगे..
सुभाष, चंद्रशेखर,भगत सिंह..
अंग्रेजों के आड़े आये..

भारत मा पर किया सर्व ..
कुर्बान,  बहादुरी से दी थी..
अपनी जान..
अंग्रेज इनकी बहादुरी देख..
डर से कापे थे..
तभी अपने बिस्तर बांधे थे..
आजाद ना किया भारत तो..
मारे जायेगे..
1947 को अंग्रेज भागे थे..

अंग्रेजो की गुलामी से 
मिली निजात..
फिर सुरू हो गई..
काले अंग्रेजो की बात..
आज़ादी चंद अमीरों..
और नेताओं को ही मिली..
आम आदमी गया ठगा ..
गुलाम ही रहा..

गोरे अंग्रेजो के हथकंडे..
काले अंग्रेजो ने बखूबी अपनाये..
फूट डालो राज करो..
एक अच्छा फंडा था..
पुलिस को जुल्म के अधिकार..
ऐसे ही चलेगी देसी सरकार..
लोकतन्त्र का झुनझुना..
जनता को थमाया..
तुम्हारा ही राज है बताया..

जनता झुनझुना बजा..
खुश होती रही..
अब अच्छा होगा अब अच्छा होगा..
बाँट जोहती रही..
अमीर और अमीर होते गये..
नेता अमीरी के बीज बोते गये..
मिल जुल् अपने हक के..
सब नियम बनाये..
जनता को पंच वर्षी ..
योजना में उलझाये..

आज तक जारी है..
वो ही कहानी पूरानी..
राजनीति,  सत्ता, चुनाव..
संसद में हंगामा..
मौज मस्ती पिकनिक..
जनता उम्मीद से..
बाट जोहती है..
अब कुछ अच्छा होगा..
रोज सोचती है..

गुलामी की जंजीरें..
जारी जारी हैं..
जनता राजनेताओ ..
से हारी है..
उनका है हक पे जोर..
जनता बेवस कमजोर ..
क्या करे बेचारी..
बेरोजगार गरीब..
भूख की लाचारी..
चारों ओर से गयी मारी..

हमारे साथ जो भी देश..
हुये आजाद..
हमसे कई गुना उनकी..
हालत अच्छी है आज..
अच्छी शिक्षा, अस्पताल..
अच्छा प्रशासन ,रोज़गार..
उन में देशों आई जैसे बहार..
सुनहरा है उनका संसार..
हम अंधकार में डूबे..
पता नहीं क्या सत्ता के मनसुबे..


क्या एक बार फिर..
गुलामी की तैयारी है..
पहिले इंग्लैण्ड के थे..
अब अमेरिका की बारी है..
क्यों कि हमारे भेदिओ की..
अमेरिका से यारी है..
अब गुलाम हुये तो..
फिर ना छूटेगे ..
सपने आजाद भारत के..
बुरी तरह टूटेगे ..


भगवान पर है..
जनता का पूरा भरोसा..
सुनहरा पल होगा कौनसा..
जब राम फिर अवतार लेगे..
एक एक अपराधी का..
हिसाब है उनके पास..
नरक बनाया है..
उनके लिये खास..
जन्मों जन्म सड़ना होगा..
खामियाजा अपराधों का..
भरना होगा..
 

माफी की गुंजाईश..
अभी भी बाक़ी है..
गलतियों का कर ले सुधार..
भगवान शायद हो जाये उदार..
देश और जनता की..
निस्वार्थ करें सेवा..
देश को विश्व का बेहतरीन..
देश बनाने का करें काम..
जैसे अमेरिका, चीन,जापान ..


भारत का भी होगा सम्मान..
अगर भ्रष्टाचार ख़त्म हो..
राजनीति से ऊपर उठ..
वतन का हो ध्यान..
पक्ष विपक्ष मिल करे काम ..
एक दूजे का सम्मान करें..
ईमानदारी से देश हित साधे..
गलत को गलत कहे..
भारत माता की मिल जय कहे..
भिन्न भाषा धर्म तब भी ..
सब भारतीय मित्र हैं..
इसी में हम सबका अस्तित्व है..!!


कविता की विवेचना:-

काले अंग्रेज/Kaale Angrej कविता आजादी के संजोये सपनों की टूटती दास्तान है. 
आजादी के दिवानों ने सोचा था, अंग्रेज जाएंगे तो हम अपने देश को दुनिया का सबसे अच्छा देश स्वर्ग बनायेंगे, देश का आखरी नागरिक भी संपन्न होगा, गरीबी का इस देश में नामों निशान ना होगा.
 
मगर सपना टूटा आजादी के बाद सत्ता गिने चुने अमीर और राजनेताओं ने हथिया ली, आम नागरिक को अलग कर सिर्फ अपने बारे में ही सोचा अपने लिये ही योजनाएँ बनायी. 

सत्ता पर कैसे काबिज रहना है  अंग्रेजों की नीतियां ही अपनायी, ब्लकि अंग्रेजों की राज करने की नीतियों का गहन अध्ययन किया. 
जैसे फूट डालो राज करो, शिक्षा को नाम मात्र की डिग्री तक रखो मगर क्लर्क से आगे का ज्ञान मत दो, पुलिस के अधिकार अंग्रेजो वाले ही रहने दो जो कि आम जनता को कुचलते हैं, चाहें पुलिस किसी को जान से मारे जो आज भी जारी है. 

देश की सारी सम्पदा पूंजीपतियों के हाथ रहें, पूंजीवाद को आज़ादी के बाद अपनाया गरीब का सारा हक खाया,  आज़ादी का गरीब को कोई लाभ नहीं मिला पहेले भी जलालत झेलता था आज भी झेलता है. 

जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत सच होती नजर आती है, 
आपराधिक पर्वती के लोग राजनीति में पैठ जमा मंत्री बन रहे हैं.
मीडिया न्याय व्यवस्था, प्रशासन सब सत्ता पक्ष के पैरोकार हैं. 

अमेरिका जैसे अमीर देश अपना हुक्म मनवा रहे हैं और हम मजबूरी में मान भी रहें हैं, आज के AI जुग में हमारा सारा डिजिटल संसार अमेरिका पर निर्भर है, वह चाहें तो हमारी सारी व्यवस्था जब चाहें ठप्प कर दे,गूगल, फेस बुक, मेल, व्हॉट ऐप सब उनका है, कॉम्प्युटर ऑपरेटिंग सिस्टम उनका हैं, हमारा क्या है, अब तो हमारी रक्षा प्रणाली पर भी उनकी निगरानी है. 

"काले अंग्रेज " कविता भारत के आम जनता की विवशता दर्शाती है कि कि कैसे पहिले भी आम जनता गुलाम थी आज भी गुलाम है, गरीबी और जलालत की जिंदगी जीने को मजबूर उसकी आज़ादी अनंत काल के लिये हो गयी दूर. 

हा भारत की जनता का भगवान पर अटूट विश्वास है, एक दिन राम भगवान, कृष्ण भगवान जरूर आयेंगे बेइमानो भ्रस्टाचारियो को नर्क पहुचा कठोर सज़ा देंगे माफ़ी भी ना होगीं नसीब. 

भगवान आने से पहिले ही जमीर जाग जाये सब अच्छा हो जाये तों कितना अच्छा हो.

भारत खनिज सम्पदा, उपजाऊ भूमी, समुद्री तट से भरपुर सभी प्राकृतिक सम्पदा से लबालब देश है, ईमानदारी हो, भ्रस्टाचार ख़त्म हो जाये तो विश्व का नंबर 1 देश बनने से कोई नहीं रोक सकता.

सही नीतियां होती तो बन जाता था, चीन हमारे समकक्ष था हमसे सालों आगे जा चुका है, विश्व की मॅन्युफॅक्चरिंग हब बन गया है, अमरीका जैसे देश को आंख दिखाने की स्थिति में है, हम भी ज्यादा तर समान चीन का वापर रहें हैं. 

अब भी हम अंदरुनी राजनीति से निकल कर देश के लिये काम करें तो बहुत जल्दी आये हुये गैप को भर सकते हैं. आओ भगवान से सब मिलकर प्रार्थना करें और अपने देश को विकास की ओर ले जाये...सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं..!!

...इति..

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Sunday, December 28, 2025

धन धन गुरू गोबिंद सिंह (Dhan Dhan Guru Gobind Singh)

Guru Gobind Singh -वीर रस कविता 
Dhan Dhan Guru Gobind Singh
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Dhan Dhan Guru Gobind Singh 


धन धन गुरु गोविंद सिंह,
धर्म की खातिर
वार दिया परिवार,
मात-पिता और पुत्र चार।

बाल दिवस बन गया ..
बड़ा पर्व शहीदी...
 मांगी थी जब धर्म आज़ादी,
नन्हे तन, पर साहस विशाल,
जिनसे काँप उठा  काल

चार साहिबज़ादे अमर कहानी,
धर्म की मशाल, शौर्य की निशानी,
खेल-खेल में दे दी कुर्बानी 
सर उठा आजादी की ठानी 

बाबा अजीत, जुझार—रण में लड़े,
हँसते-हँसते दुश्मन से  जुझ पड़े,
बाबा ज़ोरावर, फतेह—बच्चे थे,
पर इरादे और धर्म के- पके थे, 

दीवारों में चिनवा लिया,
पर विश्वास न छोड़ा,
“वाहेगुरु” का नाम लिया,
वज़ीरखान का दंभ तोड़ा, 
इतिहास में हीरे सा जोड़ा।

 उनकी कुर्बानी की याद ,
बाल दिवस मना रहें आज, 
 बचपन उम्र नहीं पहचान,
साहस, सत्य और बलिदान,

विशाल अकाल थे उन 
उन बाल हृदयों के संकल्प,
धर्म, न्याय और मानवता थे 
उनके जीवन के आदर्श।

आओ प्रण लें इस पावन दिन,
साहिबज़ादों की राह चलें,
भय से नहीं, निडर जियें,
अन्याय के आगे अडिग रहें।

मोती राम मेहरा जी..
और याद आता उनका परिवार, 
जो उनका पिलाया दुध 
अमृत हो गया
शहीद हुआ उनका सारा परिवार  

दीवान टोडर मल ने 
बिछायी धरती पर सोने की मोहरे 
धरती बना दी अनमोल 
साहिब जादौ के आगे..
दोलत का क्या मोल .

धन धन गुरु गोविंद सिंह,
धन धन चारों लाल,
माता गुज़री का हृदय विशाल 
जिनकी शहादत से रोशन है,
भारत में सत्य और धर्म की मशाल..


कविता की विवेचना:

धन धन गुरु गोविंद सिंह/ Dhan dhan Guru Gobind singh कविता गुरु जी और उनके परिवार के चरणों में समर्पित है. 

ये अलौकिक शहादत है जो धर्म और सत्य के लिये दी गई, उनकी लड़ाई किसी राज्य धन दौलत के लिए नहीं थी, इस धरती पर धर्म और सत्य की विजय के लिये थी.

 धर्म चाहे किसका भी हो थोपा नहीं जा सकता और सत्य जो अटल है, कभी मिटाया नहीं जा सकता. 

परमात्मा एक है और वो सबका है, किसी एक का नहीं चाहे उसे किसी रूप में माना जाये यही अटल सत्य है. 

औरंगजेब इस सत्य को भूल खुद को ईश्वर की सता से ऊपर मान 
बैठा और लोगों पर जुल्म करने लगा ,जो धर्म वो कहे मानों  गुरु जी 
की उनकी लडाई इसी बात को लेकर थी.

 जो पाँचवें गुरू श्री अर्जुन देव जी की शहादत से शुरू हुयी और गुरू तेग बहादुर जी, गुरु जी के चार पुत्र चार साहिब जादे श्री बाबा अजीत सिंह, श्री बाबा जुझार सिंह, श्री बाबा जोरावर सिंह, श्री बाबा फतेह सिंह और गुरु जी की माता श्री गुजर कौर जी की शहीदी के बाद भी जारी रही रही. 

श्री गुरू तेग बहादुर जी साथ उनके अनुयायी भाई मती दास(आरी से काटा गया), भाई सती दास(रुई में लपेट कर जिन्दा जला दिया गया),भाई दयाळा जी(पानी में जिंदा उबाल दिया गया) को शहीद किया गया.

गुरू गोविंद सिंह जी को उनके 40 सिखों के साथ मुग़लों की दस लाख सेना ने घेर लिया गया, गुरू जी ने पाँच पांच करके सिखों को उस युद्ध के में किले से भेजा उनमें उनके दो बड़े साहिब जादे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह भी थे, दस लाख के सेना से 40 सिख योद्धा लडे ,सवा लाख से एक लडा.

उनके छोटे दो साहिब जादे बाबा फतेह सिंह और बाबा जोरावर सिंह और गुरु जी की माता जी माता गुज़र कौर उनसे सिरसा नदी पार करते समय बाढ़ के कारण उनसे बिसर गये, जिन्हें गुरू ज़ी का रसोइया गांगुराम अपने घर ले गया मगर उसने कुछ धन के लालच में मुगल सेना से गिरफ्तार करवा दिया, जिन्हें दिवार में जिन्दा चिनवा दिया गया माता गुज़री जी की भी क़ैद मे शहादत हो गई. 

कैद के दौरान साहिब जादौ को श्री मोती राम मेहरा जी ने चोरी से दूध पिलाया जो मुगलों को पता चल गया मोती राम मेहरा जी और उनके सारे परिवार को कोल्हू मे पीस कर शहीद कर दिया गया. 

साहिब जादौ और माता गुज़री जी के अंतिम संस्कार से रोका गया, संस्कार की जमीन के लिये दीवान टोडर मल जी ने खड़ी सोने की मोहरे ज़मीन पर बिछायी तब संस्कार की जमीन दी गई. 

बाद में धर्म के लिये असंख्य सिख शहीद किये गये, भाई तारू सिंह जी ने अपनी खोपड़ी उतरवा ली पर धर्म नहीं बदला ,श्री बन्दा सिंह बहादुर और उनके 70 सिखों को शहीद किया गया .

और उनके पांच साल के पुत्र श्री अजय सिंह जी को बन्दा सिंह बहादुर जी के सामने श्री अजय सिंह जी का दिल निकाल कर श्री बन्दा सिंह बहादुर जी के मुह में दिया गया और शहीद किया गया बाद मे बन्दा जी बहादुर जी को बहुत ज्यादा यातना देने के बाद शहीद किया गया. 

"धन धन गुरु गोविंद सिंह " कविता में श्री गुरू गोविंद सिंह जी को धर्म और सत्य के लिये अपने परिवार को शहीदी के लिये कोटी कोटी नमन की कोशिश है, जो अलौकिक है जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता फिर भी कोशिश है. 

कृपया इस शहादत को अपने बच्चों को बताये और उन्हें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे. 

...इति 
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Wednesday, December 17, 2025

आजादी का हिसाब (Aajadi ka Hisab)



आजादी का हिसाब - देश भक्ती कविता 
Aajadi ka hisab
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आओ साथियो, बैठो ज़रा,
आजादी का हिसाब करें,
लाल किले की प्राचीरों से
निकले सपनों का हिसाब करें।

किसको मिली आज़ादी,
क्या पेट भर सकी भूखों का?
क्या खेतों तक पहुँची खुशहाली,
या रह गई चंद अमीरों की शोभा?

आज भी गरीब भूखा है, 
बच्चों का स्कूल नहीं..
खेतों में पसरा सूखा है..
दवा कहाँ दवाखाने ने लूटा है..

फांसी के फंदों से झूल गए जो, 
उन शहीदों ने सपने बोए थे,
उनकी कुर्बानी की कीमत में
 हम सब भी रोयें थे..

अंग्रेज़ गए, हुक्म बदला,
पर हुक्म चलाने वाले वही,
कल गोरे थे, आज देसी हैं,
पर ज़ंजीरें ढोने वाले वही।

क्या आजादी थी लीलामी ,
पूँजीवाद ने जो हथिया ली, 
लोकतंत्र का ले कर मंत्र..
गरीब को एक वोट थमा दी.

वोट एक खिलौना बना..
बदल गया जिसे भी चुना 
गरीबी मजबूरी नियति है 
गरीब के हिस्से गुलामी लिखी है. 


मज़दूर पसीना बेच रहा,
किसान आँसू उगाता है,
मुनाफ़ा मुट्ठी भर लोगों का
हर मौसम में बढ़ जाता है।

आजादी आई थी सबके लिए,
पर सब तक क्यों न पहुँची?
क्यों शिक्षा, रोटी, इलाज की
कीमत है आज भी है ऊँची?

संविधान की किताब खुली,
हर पन्ना बराबरी का हक बोले,
पर गलियों में सच्चाई देखो,
न्याय आज भी मौन डोले।

चुनावों की रंगीन सभाएँ,
नारों की भारी बारिश है,
वोट के बाद वही सन्नाटा,
जनता फिर भी खामोश है।

पर सुनो! इतिहास गवाही दे,
जब-जब जनता जागी है,
तब-तब सत्ता की दीवारों में
दरारें खुद-ब-खुद आ गई हैं।

आजादी कोई दान नहीं,
यह रोज़-रोज़ की लड़ाई है,
हक़, सम्मान और हिस्सेदारी—
यही इसकी सच्चाई है।

तो आओ फिर से कसम लें हम,
न डर से, न सौदेबाज़ी से,
आजादी का पूरा हिसाब
लेंगे मेहनत और साझेदारी से।

यह जनगीत है, आवाज़ बने,
हर गली, हर चौपाल में,
आजादी तब पूरी होगी
जब सबको इंसाफ़ मिले ...!!!

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कविता की विवेचना:

आजादी का हिसाब/Aajadi ka hisab कविता एक आम भारतीय के ख्वाब का टूटना है जो आजादी के के बाद के लिये उसने देखे थे. 

बड़े जोश उत्साह से शहादत दी थी शहीदों ने, इस उम्मीदों में कि 
हमारे भायी देशवासी आजादी का सुख भागेंगे, उन्हें क्या पता था 
यह आजादी एक लीलामी है, जो अंग्रेजो ने पूंजीवाद से समझोता कर उन्हें सौंप दी. 

अंग्रेजो से समझोता होते ही दो समुदायों के नेताओं ने दंगे भडकाय
लाखों लोग मरवाये ,देश के दो हिस्सों में बांट अपना स्वार्थ सिद्ध किया और राजा बन बैठे, भोली जनता ठगी सी रह गयी, लोगों के सदियों पुराने घर बार छुटे करोड़ पति रोड़ पति बन गया. 

मगर इन राजाओं का क्या बिगड़ा वे पहिले भी ऐश करते थे अब तो राजा बन गये, इस देश के भाग्य विधाता, गरीब से रहा वही अंग्रेजो वाला नाता, पहिले भी पुलिस के द्वारा कुचला जाता था आज भी कुचला जाता है, पहिले भी शिक्षा, इलाज से रोजगार से वंचित थे, आज भी वंचित हैं. 

क्या आजादी के पहले का एक भी भगत सिंह, सुभाषचंद्र, चंद्र शेखर आज़ाद नहीं बचा जो देश के हर नागरिक के बारे में सोचता.
हमारे साथ आजाद हुये देश तरक्की में हमसे सौ साल आगे निकल गये, चीन उसका उदाहरण है. 

हमारे यहां चंद पूँजीपतियों ने देश की ज्यादातर संपत्ति पर कब्जा अपने राजनीतिक मित्रों के सहयोग से कर लिया और देश उनकी मर्जी से चल रहा है, लोकतंत्र दिखाने के लिये बचा है. 

"आज़ादी का हिसाब" कविता इस देश की 80% आबादी जो सरकारी राशन पर निर्भर लाचार बेबस है की दुरदशा ब्यान करती है, कोई सुनने वाला नहीं, अब कब कोई भगत सिंह,चंद्र शेखर, सुभाष चंद्र बोस आयेगा..या फिर श्री राम, श्री कृष्ण, श्री बजरंग बली आयेंगे असली आजादी दिलाएंगे. 

...इति..

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Saturday, November 22, 2025

भारत भाग्य विधाता (Bharat Bhagya Vidhata)

Bharat -देश भक्ती कविता/गीत 
Bharat Bhagya Vidhata
Bharat Bhagya Vidhata
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गीत : भारत भाग्य विधाता 🎵

(कोरस)
जय भारत, जय भारत,
विश्व सारा गाता है!
धरती का स्वर्ग बना तू अब,
भारत भाग्य विधाता है॥

(पद 1)
उजियारा हर कोने में है,
हर दिल में विश्वास नया,
शांति का दीप जल उठा ,
सपनों का इतिहास नया।
चाँद-सितारों पर लिखता भारत,
अपना परचम लहराता है॥

(कोरस)
जय भारत, जय भारत,
विश्व सारा गाता है!
धरती का स्वर्ग बना तू अब,
भारत भाग्य विधाता है॥

(पद 2)
न भूख रही, न दर्द कोई,
हर मन में अब उल्लास है,
मेहनत, निष्ठा, प्रेम का संगम,
यही देश की साँस है।
सत्य-अहिंसा के पथ पर चल,
विश्व को राह दिखाता है॥

(कोरस)
जय भारत, जय भारत,
विश्व सारा गाता है!
धरती का स्वर्ग बना तू अब,
भारत भाग्य विधाता है॥

(पद 3)
हर नारी अब शक्ति स्वरूपा,
हर बालक में दीप जले,
युवा हैं भारत के कंधे,
जो सपनों को सच कर चले।
विश्व समता, मानवता का,
संदेश यही फैलाता है॥

(कोरस)
जय भारत, जय भारत,
विश्व सारा गाता है!
धरती का स्वर्ग बना तू अब,
भारत भाग्य विधाता है॥

(अंतिम पद)
आओ मिलकर वंदन करें,
इस नवयुग के निर्माता को,
भारत ने फिर इतिहास  रचा ,
प्रेम-शांति का दूत  कहलाता है।
विश्व कहे अब गर्व से -जग का, 
“भारत भाग्य विधाता है!” 🌺🇮🇳

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कविता की विवेचना:

भारत भाग्य विधाता/Bharat Bhagya Vidhata गीत 
भारत के गौरवांवित इतिहास को स्मरण करके लिखा गया है 
जब भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, हमारा गौरवशाली 
इतिहास है.

बाद में भारत 900 साल के लिये गुलाम हो गया, पहले 700 साल मुगलों का और 200 साल अंग्रेजो का गुलामी के दौर में 

इस सोने की चिड़िया को बहुत नोचा खतोचा गया आर्थिक और सामाजिक रूप से लूट कर दौलात इस देश से बाहर भेज दी गई, सामाजिक जीवन को तहस नेहस किया गया, लोगों 

की धार्मिक और सामाजिक आजादी छिन् ली गई जबरन धर्म परिवर्तन किये गये और फिर धर्म के नाम से लोगों को आपस में लाडया गया, लोगों को गरीबी की कगार पर लाया गया. 

आजादी के लिये हमारे महापुरुषों ने बेइंतिहा कुर्बानिया दी 

तब भी अंग्रेज जाते जाते देश को बांट गये जो आज भी नासूर बना हुआ है, आपस में लड धन और ऊर्जा आज भी जाया कर रहे हैं, जैसा कि अंग्रेज चाहते थे. 

आजादी के बाद भारत ने कई सुनहरे सपने देखे कि भारत विश्व का सिरमौर बने , मगर हमारे राजनीतिक लोग पहिले अपना भविष्य सुधारणे में व्यथ हो गये. बीच बीच में देश का 

विकास भी हुआ जो बहुत धीमा था, हमारी आँख तब खुली जब हमारे साथ ही आजादी पाने वाला चीन हमसे 80 साल आगे निकल कर विकसित देश बन गया, जब कि उनकी आबादी भी हमारे देश जैसी विशाल थी, उनके राज नेताओं ने 

देश का पहले सोचा फिर राजनीति, मगर हमारे देश में अब भी राजनीति चल रही है और देश के विकास को ताक पर रखा जा रहा है. 

"भारत भाग्य विधाता " हमारे राष्ट्र गान में हमारे महान नोबेल पुरस्कार विजेता कवि श्री रबीन्द्रनाथ टैगोर लिख गये हैं,और हम सारे भारत वासी इसे गर्व से गाते हैं, लेखक ने इस गीत में 

भाग्य विधाता के सपने को साकार होते देखा है, और भारत आज भाग्य विधाता विश्व गुरु बन चुका है कल्पना को गीत में साकार किया है, आशा है हमें कोई ऐसा राष्ट्र नेता मिलेगा जो इस सपने को साकार करेगा. भगवान से प्रार्थना है वो दिन जल्द आये. 

...इति...

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