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| Gumnaam Kavi Image from: pexels.com |
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Sunday, October 17, 2021
गुमनाम कवि(Gumnaam Kavi)
Sunday, September 26, 2021
प्यार और कविता( Pyar Aur Kavita)
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| Pyar Aur Kavita Image from: pexels.com |
Thursday, June 17, 2021
कविता का जन्म (Kavita ka Janam)
सवाल और ख्याल...
जहन में आते जाते हैं ...
कई बार आपस में उलझते..
कभी लड़ जाते हैं...
इन सवालों ख्यालों को पकड़ पकड़...
एक लड़ में तरतीबन पिरोना ही...
कविता का जन्म है...
जो बनते बनते बन जाती है...
एक सुंदर मोतियों की लड़ सी..
सज जाती है,और सम्पूर्ण हसीन लगती है...
कभी अधूरी सी रह जाती है ...
अस्तित्व में नहीं आ पाती ..
नही जन्म ले पाती...
अच्छा अवसर अच्छा मूड कवि का...
एक सुंदर कविता को जन्म देता है...
कविता कई दिलो को छू लेती है...
कवि की प्रिय होती है...
कवि के हृदय में बसती है...
विचारों के सागर का मंथन...
और सुंदर कथन का सार है कविता ...
कवि के दिल और जहन की...
गहराइयों का जतन आभार है कविता ...
कवि के ख्यालों विचारों परिकल्पनायो...
का आयना प्रतिबिंब है कविता...
एक लंबी कहानी खूबसूरत अंदाज़ में...
चंद पंक्तियों में समेटते हुए ...
पूरी गाथा दिल छूने के अंदाज़ में...
बयान करती है कविता ....
हर दुख दर्द हंसी खुशी...
अपने आगोश में समाती है कविता...
कवि की प्रिय ,कवि को भाती है कविता...!!
Sote jagte chalte bhagte..
Swal aur khayal..
Jahan main aate jate hai..
Kai bar apas main uljhate..
Kabhi lad jate hai..
In sawalon khayalon ko paka pakad. .
Ek lad main tartiban pirona hi..
Kavita ka janam hai..
Jo bante bante ban jati hai..
Ek sunder motiyo ke lad si..
Saj jati hai, aur sampurn hasin lagti hai..
Kabhi adhuri si rah jati hai..
Astitva main nahi aa pati..
Nahi janm le pati..
Achha avsar achha mood Kavi ka..
Ek sunder kavita ko janm deta hai..
Kavita Kai dilon ko chhoo leti hai..
Kavi ki priy hoti hai..
Kavi ke hearday main basti hai..
Vicharon ke sagar ka manthan..
Aur sunder kathan ka saar hai Kavita..
Kavi ke dil aur jahan ki..
Gahraiyon ka jatan abhar hai Kavita..
Kavi ke khayalon vicharon parikalpnayon..
Ka aaina pratibimb hai Kavita ..
Ek lambi kahani khubsurat andaz main..
Chand panktiyon main samete huye..
Puri gatha ko dl ko chhoo lene ke andaz main..
Byan karti hai Kavita..
Har dukh dard hansi khusi..
Apni aagosh main samati hai Kavita..
Kavi ki priy , Kavi ka Bhati hai Kavita ..!!
_जे पी एस बी
कविता की विवेचना:
कविता का जन्म/ kavita ka Janam कविता की उत्पति और श्रुजनकता इसमें वर्णित की गई है।
कविता लिखने कवि जा बैठता है शब्द आते जाते इधर उधर भटकते हैं , उनमें से चुन चुन कर शब्दो को कागज में बैठाना कविता की रचना की शुरुआत होती है, कई बार विषय से भटक जाती है कविता, उसे विषय में लाना कवि का काम होता है।
लंबी बात या कहानी को सुंदर अंदाज में लघु से लघु रूप में रुचिकर ढंग से पाठको तक लाना ही कविता है। कई बातें सामान्य रूप में नही कही जा सकती कविता के माध्यम से आसानी से खूबसूरत अंदाज में कह दी जाती है।
"कविता का जन्म" कविता कविता लिखते समय कवि के मन की उधेड़ बुन और कवि के मन की बात का वर्णन करती है।
कृपया कविता को पढ़े और शेयर करें।
... इति...
_जे पी एस बी
jpsb.blogspot.com
Saturday, May 29, 2021
कवि हो जाओ (Kavi ho Jao)
छोड़ो रोज का रोना धोना...आओ कवि हो ना...
आरोप प्रत्यारोप भड़ास..
जो भी हो यहां निकालो..
देनी जिसको जितनी गलियां दे डालो..
जब जब अहसहाय महसूस करो...
एक नई कविता बना लो...
तुम्हारी कविता से ...
कोई फ़र्क नही पड़ेगा तुम्हे भी पता है...
तुम्हारा अपराधबोध तो कम होगा...
तुम्हे संतुष्टी ही मिलेगी...
एक दस्तावेज तुम्हारे नाम कही दफ़न होगा..
तुम्हे भी बेमौत नकारा मरने का न गम होगा...
Chhodo roj ka rona dhona..
Aao Kavi Ho Na..
Aarop partyarop bhadaas..
Jo bhi ho yaha nikalo..
Deni ho kisko jitni galiya de dalo..
Jab jab ahsahay mahasus karo..
Ek nayi Kavita bana Lo..
Tumhari Kavita se ..
Koi farak nahi padega tumhe bhi pta hai..
Tumhara apradh bodh to kam hoga..
Tumhe santusti hi milegi..
Ek dastavez tumhare naam kahin dafan hoga..
Tumhe bhi bemaout nakara marne ka na gam hoga..
जे पी एस बी
कविता की विवेचना:
कवि हो जाओ/ Kavi Ho Jao कविता कवि अपने आस पास कई घटनाएं वा देश की व्यवस्था में कुछ ना कुछ ऐसा होता है लगता है बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है और हम कुछ नहीं कर सकते तो गुस्सा आता है , चिढ़ होती है।
यह गुस्सा और चिढ़ हम अपने आप पर ही निकालते हैं , क्यों कि किसी को कुछ कह नहीं सकते, खुद कुछ कर नही सकते सिर्फ अपने आप को ही कोस सकते हैं।
कवि का कहना है इसी गुस्से को लिखो कविता के रूप में तुम्हारा गुस्सा कुछ कम होगा और तुम्हे लगेगा कि तुमने किसी को शिकायत कर दी है, जब कि तुम्हे भी पता है कि कुछ नही हुआ है मगर आत्म संतुष्टि जरूर मिली है ।
वैसे जो कोई नही सुनता वो भगवान सुनता है और भगवान जरूर ही तुम्हारी पीड़ा का समाधान भी करता है।
जिन कामों से तुम्हे गुस्सा आ रहा है, भगवान उन लोगों की भी खबर जरूर लेता है और उन्हें सजा भी जरूर देता है।मगर उन गुनाहगारो की बुद्धि और चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी रहती है, उन्हे पता ही नही चलता कि उन्हें सजा मिली है, मगर सजा तो जरूर मिलती है।
करोना काल अभी भी चल रहा है खतरनाक दूसरी वेव कुछ अंश अभी भी बाकी हैं, इस समय प्रशासनिक व्यवस्था पर हर नागरिक को बहुत गुस्सा आया ।
ऑक्सीजन का ना होना, बजाय ऑक्सीजन सप्लाई पूर्ति करने के कोर्ट में जाना, अपनी नाकामियां ना मानना, मौत के झूठे आंकड़े देना , मौतों को छुपाना , पब्लिक की मौतों को रोकने के लिए लिए कुछ खास ना करके राजनीति करना।
करोना काल का राजनैतिक फायदा उठाना चुपचाप करोना काल का फायदा उठाकर कानून बनाना जो जनता के हित में नहीं हैं आदि आदि कई कारण है जिस पर गुस्सा आता है मगर कुछ नही कर सकते।
करोना कॉल से पहले भी बढ़ती मंहगाई , बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था , स्वास्थ व्यवस्था भ्रष्टाचार आदि कई विषय हैं जिनपर गुस्सा आता है मगर कुछ नही कर सकते ।
इन्ही सब अवव्यस्थायो को देख जब जब गुस्सा आए लिखी एक नई कविता बनाओ यही कवि का कहना है या घुट घुट के मर जाओ ।
"कवि हो जाओ" कविता में आम आदमी की बैचेनी को कुछ कम करने के लिए कवि ने सुझाव दिया है कि कवि हो जाओ और कुछ तो मानसिक शांति पाओ।
कृपया कविता को पढ़े और शेयर करें।
... इति...
_जे पी एस बी
jpsb. blogspot.com
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Thursday, May 6, 2021
मैं कवि हो गया(Mai Kavi ho Gaya)
Main Kavi Ho Gaya
Image from :pexels.com
यारो मैं कवि हो गया...
झूठ कपट की दुनियां से दूर...
अपने कल्पना लोक में खो गया...
मानता हूं मैने भी की है...
सच में कल्पना की मिलावट..
घुशखोरो भ्रष्टाचारियों से तो...
जब जब अववेस्था..
कविता लिखने का नशा...
मेरे रोम रोम में बसा है ...
शराब,गांजा भांग सब पैसे से आते हैं...
ये तो बिन पैसे का नशा है...
क्या आपको भी अवव्यवस्था ..
पर बहुत गुस्सा आता है ..
आइए मेरा साथ निभाइए ..
कवि बन जाइए..
तहे दिल से स्वागत है आपका..
मिल कर फन कुचलेंगे ..
नैंसफाफी के पाप का ..!!
Yaron mai Kavi ho gaya..
Jhuth kapat ki duniya se dur..
Apne kalpana Lok me kho gaya..
Manta hun maine bhi ki hai..
Sach main kalpana ki milawat..
Ghuskhoron bhasrachariyon se you..
Achhi hai apni aadat..
Jab jab avyavastha ..
par gussa aata hai..
Bebasi lachari hoti hai..
Aur kuchh kar nahi sakta..
Ek nai kavita izad hoti hai..
Kavita likhane ka nasha..
Mere rom rom main bsa hai..
Sharab ganja bhang sab paise se aate hai..
Yah tou bin paise ka nasa hai..
Kya aapko bhi avyavyastha ..
par bahut Gussa aata hai..
Aaiye mera sath nibhaiye ..
Kavi ban jaiye..
Tahe dil se swagat hai aapka..
Mil kar fan kuchalenge..
nainsafi ke paap ka..!!
_JPSB
कविता की विवेचना:
मैं कवि हो गया/Main Kavi Ho Gaya कविता में कवि स्वयं के बारे में कह रहा है कि वो कवि बन गया है क्यों बना उसके कारण कवि ने कविता में बताएं हैं।
सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार भाई भतीजावाद अव्यवस्था गुंडागिरी आदि से कभी न कभी हर नागरिक का सामना हो ही जाता है, कोई भी सरकारी काम घुस दिए बगैर होता । अगर घुस की परंपरा को नही निभाया तो अपना काम करने के लिए जूते और नाक दोनो घिस जायेंगे ।
महंगाई पर किसका कंट्रोल नही बढ़ती जा रही है, हर चुनाव में हर राजनेतिक पार्टी वादा करती है की उसकी सरकार बनी तो सबसे पहले महगाई कम करेंगे , मगर सत्ता मिलते ही अपना वादा भूल जाते हैं और महंगाई और बढ़ जाती है।
इसी प्रकार शिक्षा व्यवस्था व्यवसाय में बदल गई है, शिक्षा इतनी मंहगी हो गई है की गरीब की छोड़ो अब मध्यम परिवार भी अपने बच्चो को पढ़ा नहीं सकता, शिक्षा का निजीकरण अभिशाप है।
सरकारी स्वास्थ्य सुविधाए जर जर हैं , यहां भी प्राइवेट हॉस्पिटल हावी हैं और सुध व्यवसाय के केंद्र हैं ।
इसके अलावा भी अनगिनत समस्याएं हैं । जिस पर आम आदमी पिस् रहा है, गुस्सा आता है मगर कर कुछ नही कर सकता। इसी लिए कवि ने कहा है ,कि वह कवि बन गया घूस भ्रष्टाचार की दुनिया से दूर अपनी ख्यालों की दुनियां में रम गया।
"मैं कवि हो गया" कविता में कवि ने अपनी मन की स्तिथि और अव्यस्था का वर्णन किया है, उसने कहा वह कुछ नही कर सकता मगर इस व्यवस्था के खिलाफ कविता तो लिख सकता है।
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... इति...
_जे पी एस बी
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