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Saturday, November 25, 2023

दिल में भगवान था (Dil me Bhagwan tha)

Dil   - प्रेम त्रिकोण कविता                             
Dil me bhagwan tha


मैंने बसाया था..
तुम्हें अपने दिल में..
भगवान सा..
गुमान था मुझे..
तुम पर बहुत..
मगर क्यों ना हो सका..
तेरी बेवफाई का..
जरा भी भान सा..

क्या करु मैं अब..
तेरे विचार..
बदल सकता नहीं..
तुम्हें तो चाहिये था..
एक शख्स..
बड़ा धनवान सा ..
सब्र किया होता..
मैं भी एक..
काबिल इंसान था..

तेरे बारे में..
सोचा बहुत..
सोचने से खुद को..
रोका बहुत..
फिर भी..
आ ही जाता है ..
दिल में..
तेरी यादों का..
तूफ़ान सा..

मेरा दिल तो कभी..
तेरा अपना घर था..
खुशियो से भरा भरा..
आज एक खण्डहर है..
वीरान सा..
गलत तू थी कि..
मैं था..
यह हम दोनों के..
दरम्यान था..

चाहत मेरी..
दिल में ही..
दफॅन हो गई कहीं...
तेरी बेवफाई से..
उभर ना पाया..
हमारे बीच में आया..
कौन शैतान था..
कदर तूने ना की..
मेरे प्यार की कभी..
ना समझा जो मेरा..
तुझ पर अहसान था ..

शोहरत दौलत..
मिले ना मिले..
इस जीवन में..
एक साथी मिले..
प्यारा सा दिलबर..
इंसान सा..
दौलत की..
ख्वाईश को चुना तूने..
चाहे दौलत के पिछे..
छुपा हैवान था..

क्या उमंगे तेरी..
पूरी होंगी अब..
जिंदगी का रुख..
खुद मोड़ा तूने..
पत्थर बन..
प्यार भरा दिल..
तोड़ा तूने..
तुझे क्या पता..
उस दिल में..
तेरा ही भगवान था ..!!

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कविता की विवेचना: 

दिल में भगवान था/Dil me Bhagwan tha कविता आज के  तथाकथित भौतिक और आधुनिक युग में प्यार कहाँ खो गया है. किसी को पता नहीं. 

मतलब और पैसा यह आज के दौर का खेल कैसा, सब इसी अजीब खेल में उलझे हुये हैं, सच्चे प्यार की तलाश है, सच्चा प्यार मिला भी तो उसकी कदर कहाँ. 

प्यार एक खामोशी है, प्यार एहसास है, महसूस करना होता है, जताया गया प्यार धोखा है, प्यार एक वादा है, कुर्बानी का इरादा है.

जहाँ प्यार वहाँ स्वयं भगवान हैं, सब जानी जान हैं, प्यार भरे दिलों में ईश्वर बसता है, और जहां ईश्वर बसता है वहाँ जहां की सारी खुशिया अपने आप मिलती हैं, कोई दुख  नहीं हर कोई हसता है. 

"दिल में भगवान था " कविता में दिल तोड़ने वाले ने तोड़ दिया, धोखा देना था दे दिया, इस बात से अनजान कि उसने भगवान को नाराज किया है, जिस दिल को तोड़ा वही तो भगवान था. 

...इति...

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Saturday, July 8, 2023

आँचल सी रहो (Aanchal si raho)

Aanchal  प्रेम कविता              
Aanchal si raho
Aanchal si raho
Image from:pexels.com 


तुम मेरे ख्यालों में..
नदी सी बहों ..
हवा के झोंकों से..
कुछ कुछ कहो..
मेरे दिल में..
आँचल सी रहो..

मचलता है मन..
रूबरू होने को..
सपनों में दिखती हो..
ओझाल होने को..
दिल करता है..
आंखे बंद कर..
तेरा दीदार करू..
बाते हजार करू..

कल्पना के घोड़े..
दौड़ता हूँ..
कभी बहुत पास..
कभी दूर हो जाता हूँ..
नजदीकियां भाती हैं..
तेरी याद..
चलचित्र सी आती है..
शकुन पहुंचाती है ..

तुम पक्षी बन..
कहीं उड़ चली..
ना भायी मेरी गली..
उजड़ गया..
मेरा आशियाना..
रुसवाई था..
सिर्फ एक बहाना..
तुझे भाया..
परवाना बेगाना..

कैसे रास्ता रोक लू..
कैसे तुझे टोक दू..
अधिकार की डोर को..
तूने ही तो तोड़ा है..
मुझे अंजान..
मंजिल की ओर..
मोड़ा है..
कौन आया..
हमारे बीच रोड़ा है..

कचरें सामान सी..
तेरी यादे..
क्यों ढोता हूँ..
फेक दू कूड़ेदान में..
मगर फिर..
भावुक होता हूँ..
किसी पुरानी..
दिल की अलमारी में..
यादों को संजोता हूँ..

किसी अनजान..
मोड पर..
सारे बंधन तोड़ कर..
खडा हूँ अकेला..
सूना सूना लगे..
इस दुनिया का मेला..
इस मेले में..
खो जाऊँगा..
फिर भीड़ का..
हिस्सा हो जाऊँगा..
भुला नहीं तुझे..
मगर भुलायुंगा ..!!

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कविता की विवेचना: आंचल सी रहो/ Aanchal si raho कविता किसी चाहने वाले का दिल का गुबार है. 

सच्ची चाहत आज कल कहाँ रही, मगर अगर कोई धोखे से सच्चा चाहने वाला मिल गया तो उसकी कदर नहीं की ज़माने ने. उसे ना समझ ही समझा आज के तथाकथित समझदारी ज़माने ने. 

सच्चे चाहने वाले को अक्सर धोखा ही मिला है, इस भौतिक वादी युग में चाहत की कीमत कहाँ,जमाना
पूछता है, चाहत तो तेरी ठीक है पर दौलत कहाँ. 

प्यार काफी नहीं आज के जमाने में प्यार के साथ जरूरी है पैसा तो निभ ही जागेगा,तू हो चाहे जैसा. 
पैसे की खनक बेवफ़ा बना देती है. 

कसूर उनका नहीं है ज़माने का जिसने प्यार को पैसे से तोला और दौलत को प्यार का मापदंड बना दिया. 

"आँचल सी रहो " कविता में लाख ठुकराए जाने के बाद भी प्रेमी प्रेमिका की यादें संजोये रखना चाहता है, चाहते हुये भी नफरत नहीं कर पाता, और दिल को एक कोना अपने प्यार को दे देता है. 

... इति...

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Thursday, July 6, 2023

अनाड़ी (Anadi)

अनाड़ी       - प्रेम त्रिकोण-बेवफाई-कविता 
Anadi
Anadi
Image from : pexels.com 



सीख लिया है मैंने..
आंसुओ को पीना..
ग़म में..
सिसकते सिसकते जीना..
अच्छा हुआ तू..
बेगानी हुयी..
यही खत्म कहानी हुयी..

खत्म हुआ सिलसिला..
रिश्ता निभाने का..
ढकोसला था प्यार तेरा..
बोझ था ज़माने का..
जीते जी टूट गया बंधन..
मर कर टूटना ही था..
सात पल ना निभे..
सवाल कहाँ..
जन्मों जन्मों निभाने का..

जन्म से पहले..
तुम कहां थे..
और मैं था कहाँ..
और मरने के बाद..
जाओगे कहाँ..
जब कुछ पता नहीं..
तो ग़म किस बात का..
अकेले ही..
इस दुनिया में है..
आना जाना..
कभी पिछले..
जन्म के रिश्ते को..
किसी ने ना पहचाना..

अच्छा हुआ मैंने..
ना ली साँसे उधार तेरी..
हिम्मत ना थी..
इन्हें लौटाने की..
मेरी सांसों का..
एहसास होगा तुम्हें भी..
रख लो..
अब जरूरत नहीं..
इन्हें लौटाने की..
मेरी जिंदादिली..
याद दिलाती रहेगी..

नजरों में बसाया था..
"तुम्हें..."
अब किरकिरी सा..
चुभता है..
कोई दवा नहीं मिल रही..
इसे मिटाने की...
तुम मेरी नजरों से ..
हट जाओ दूर..
मुझे आखों में..
जहान बसाना है..
जरूरत नहीं अब..
तेरी तस्वीर बसाने की..

मेरी धडकने ..
तुम साथ ले गये..
"बेधडक.."
नहीं समझी.. 
औपचारिकता भी ..
इन्हें वापिस लौटाने की..
छल के हर लिया..
दिल विल मन मेरा..
कितना स्वार्थी है..
स्वभाव तेरा..

खरीदी करने..
निकले तुम ..
थोडा सा दिल..
थोडा सा मन..
थोडा सा यार..
थोडा सा प्यार..
सब लिया उधार..
था सब अनमोल..
मगर किया तूने..
तोल मोल..
नापा, नफा नुकसान ..
सद्बुद्धि दे तुम्हें भगवान..

अचानक तुझे..
प्यार के बाजार में..
सौदा नया जचा ..
पुराने में अब..
इंट्रेस्ट ना बचा..
मैं सौदा बन..
अवाक रह गया..
और तुम बने..
चतुर व्यापारी..
सारी दिल की दौलत..
तेरे सामने हारी..
सच है दुनिया वालों..
मैं निकला अनाड़ी..!!

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कविता की विवेचना: 

अनाड़ी/Anadi कविता एक सच्चे प्रेमी बनाम एक व्यापारिक दृष्टी कोण वाली तथाकथित आधुनिक प्रेमिका की कहानी है.

एक तरफ प्रेमी अपना सर्व अपने प्यार के लिये लुटाने को तैयार है और प्रेमिका इसे एक अच्छे या बुरे सौदे के रूप में जांच परख रही है, साथ ही इससे और बेहतर सौदे की भी उसे तलाश है. 

जब तक मन चाहा सौदा नहीं मिलता, पुराने को और जांचा परखा जा रहा है, और किसी तरह काम चलाया जा रहा है. 

जैसे ही किसी सलाहाकार ने सलाह दी, नया सौदा समझाया, पुराने को तोड़ने में पल भी ना लगाया, और बेरहमी से तोड़ दिया रिश्ता पुराना, दिल पर क्या 
बितेगी हाल भी ना जाना. नये सौदे के साथ हो लिये.

"अनाड़ी " कविता आज के भौतिक वाद ज़माने को रेखांकित करती है  जहा भावनाऔ का कोई मोल नहीं 
कोई त्याग कुर्बानी अब कोई प्यार में नहीं करता, हर कोई दौलत और भौतिक सुखों के लिये मरता, उसके लिये चाहे मर्यादित सीमा लाघनी पडे. 
किसी से दिल ना लगाना, कब हो जाये बेगाना..

...इति...

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Saturday, June 3, 2023

प्यार एक धोखा (Pyar ek dhikha)

Pyar                -प्रेम त्रिकोण-बेवफाई-कविता 
Pyar ek dhokha
Pyar ek dhokha
Image from:pexels.com 


प्यार व्यापार बन गया..
दिल जलों का..
त्यौहार बन गया..
दिल की लगने लगी बोलियां..
जिसने ज्यादा पैसा फैका ..
दिल उसी का हो लिया..

फिर किसी ने टोका है..
प्यार एक धोखा है..
नोक झोक तकरार..
ऐसा ही है अब प्यार..
सपनों से खिलवाड़..
प्यार अब है व्यापार..

सुख है तो प्रीत है..
तब ही प्रेम का गीत है..
दुख में सन्नाटा है..
प्यार में देखा जाता..
नफा है या घाटा है..
घाटे का सोदा नहीं होना..
फिर क्यों है रोना धोना..

प्यार का एकलौता फूल..
नहीं लगता है प्यारा..
अलग अलग फ़ूलों की..
खुशबू ले भंवरा आवारा..
तेरा फूल अब हुआ मेरा..
जो कल तक था तेरा..
मोल भाव कर लिया ..
वो अब है मेरा पिया ..

कली जब फूल बनी..
तितली बन उड़ चली..
भंवरे आये करते गुंजन..
फूल पर हुये मगन..
फूल ने पंखुड़िया फैलाई..
खूशबू भंवरे को भाई..
आजकल जिंदा लासै..
घूम रही हैं..
दिल बस खाली खोखा है..
प्यार आजकल धोखा है..

एक ही सूरत से प्यार..
जंचता नहीं..
प्यार में धोखा ना हो..
खाना पचता नहीं..
सूरत बदलती रहनी चाहिये..
कुछ दिनों में..
एक नयी सूरत चाहिये..
कर लो फिर इकरार..
नयी सूरत से झूठा प्यार..
मिला जब तुम्हें मौका है..
प्यार आजकल धोखा है..

नया मीत ना मिला..
तो लड़ाई का बहाना है..
दीवारों से सर टकराना है..
आसमान सर पे उठाना है..
क्यों प्यार का पागलपन है..
हक नहीं अगर धन कम है..
करो पहले धन का जुगाड़..
तब ही है प्यार का अधिकार..

प्यार अब बाजार में बिकेगा..
महंगा प्यार ही टिकेगा..
फिर भी कोई गारंटी नहीं..
नये की तलाश रहेगी कहीं..
गर मिल गया कोई अच्छा..
तो पुराने को फिर..
मिलेगा गच्चा..
आजकल यही है चर्चा..
नये मीत पर करो खर्चा..
फिर नज़र रखो पैनी..
बनेगी एक और प्रेम कहानी..

यह दौर है धोखे का..
प्यार अब खेल है मौके का..
गर्दन इस खेल में..
मासूम की ही कटनी है..
जहां प्यार का  नाम आया..
दुर्घटना जरुर घटनी है..
मासूमों का..
यहा कोई काम नहीं..
मासूमों को.. 
प्यार के नाम से नोचा है..
सावधान प्यार अब धोखा है..!!

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कविता की विवेचना: 
प्यार एक धोखा/Pyar ek dhokha कविता आज के परिप्रेक्ष्य में प्यार एक धोखे का मौका बन रह गया है. 

प्यार की पवित्रता, त्याग, पारदर्शिता, कुर्बानी कब के लोप हो चुके हैं, प्यार एक धोखे बाजी का खेल और माखौल बन रह गया है, प्यार की अच्छाई जा चुकी है. 

प्यार के नाम से अब  सिर्फ खेल है, किसी भी ढंग से प्यार के नाम हथियाना है, तोल मोल के घाटे नफे का अंदाज लगाना है, अगर नफा दिखा नोच खाना है, आखिरी बूंद निचोड़ फिर ठुकराना है. 

फिर नये मुर्गे की तलाश, जब तक नहीं बुझती प्यास, 
लगे कई कयास अगर मिल गया कोई अच्छा तो पुराने को अचानक गच्चा.

पुराना सिर पिट लेगा या हो जायेगा पागल, मगर इस भी किसी को कोई फर्क़ नहीं पडता, ना हमदर्दी ना था प्यार, ये तो एक सौदा था मन बहलाने का.

अब ऊब गया दिल तो क्या करें, नया आजमाने की आदत है पुराना चाहे अपनी मौत मरे, किसने रोका है, प्यार बस छलने का मौका है. 

"प्यार एक धोखा "कविता पश्चिम से आयातित कल्चर 
रेखांकित करती है, लिव इन और प्यार के नाम नये आयाम जिसमें एक दूसरे के सोसण के मौके तलाश किये जाते हैं.

 जो चालाक होता है बाजी मार जाता है, सीधा दिल की मार खाता है, तड़फॅ के रह जाता है. 

यहां- कोई सिद्धांत लागू नहीं होते, कोई दोस्त यार या भाई की चादर ओड  ठगता है. और इस धोखे मक्कारी को अपनी जीत मानता है. अगर दुनिया इस ओर जा रही तो नरक यही है, इंसान अब जानवर पशु हो गया है, कुत्ते बिल्ली का खेल हो गया आज का प्यार, बचे इससे संसार. 

..इति..

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Saturday, May 27, 2023

असली नकली चाहत (Asali nakali chahat)

असली नकली    प्रेम त्रिकोण-बेवफाई-कविता        
चाहत असली नकली
chahat Asli nakli
Image from: pexels.com 


होगी किसी के..
ख्वाबों में वो..
हमारे ख्वाबों में..
अब आती नहीं..
मेरी शक्ल उसे..
बिल्कुल भाती नहीं..

कोई मिल गया होगा..
हमसफर नया..
हमारी कदर ..
उसे भाती नहीं..
फिक्र तब भी है..
कहीं धोखा ना मिले..
दिल टूटने के सिलसिले..

क्यों चिंता करते हो..
उसे ना रही परवाह तेरी..
आंखे फेर ली उसने..
जला दी तस्वीर तेरी..

खुशिया देकर भी तुम..
खुश ना कर सके उसको..
उम्मीदे थी हजारो लाखों..
क्या करें गर ना समझ सको..

तेरी सादगी मासूमियत..
शायद वहम था मेरा ..
चक्रव्यूह समझ ना पाया..
काश मैं भी चालाक होता..

खिलौना क्यों बना दिल..
किसी का मन बहला..
खेल खाल तोड़ दिया..
किसे परवाह जो दर्द हुआ..

काश कह दिया होता..
ऊब गई है सूरत से..
मैं कहीं गुमनाम होता..
अपना दिल तो ना खोता..

हा माना भूल हुई..
जान से बढ़कर चाहा..
भागा छाये के पीछे..
छाये हकीकत नहीं होते ..

पलक झपकते भुला दिया..
काश मेरी फितरत होती..
मेरी आत्मा ना रोती..
लगेगा जमाना भुलाने में..

खंडहर सी हो गयी दुनिया..
क्या करु तेरे फैसले का..
भा गया तुझे कोई और..
मुबारक आबाद रहो..
जश्न मेरी बर्बादी का करो..

जान कर या अनजाने में..
खता किससे हुयी..
कोन घायल हुआ..
कैसा चलन है ज़माने में..

दुवा ही निकलती है..
बददुवा हो नहीं सकती..
चाहत की सच्ची..
भुक्त रहा हूं मैं सज़ा..
खुश रहो तुम सदा..!!

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कविता की विवेचना: 

चाहत असली नकली/Chahat Asali Nakli कविता आज के तथाकथित आधुनिक ज़माने में प्यार की परिभाषा बदल गई है, उसी को इंगित करती यह कविता है. 

चाहत मोल भाव सोदा है, प्यार का मॉल है, जहा प्यार बिकता है कभी कोई भा गया कभी किसी पर दिल आ गया .

तू नहीं तो और सही और नहीं तो और सही अंत तक चुनाव जारी रहता है, परमानैट चुनाव हो नहीं पाता क्यों कि कभी दिल इस पर और किसी और पर आता मगर उसके बाद भी कोई और है भाता ,धन दौलत से है ज्यादा नाता. 

सच्चे प्यार की जगह "लाइव इन "ने ले ली, जॅम गया तो ठीक वर्ना कोई और सही, इसी चुना चुनी में पूरी लाइफ निकल जाती है. 

मगर अंत तक चाहत फिक्स नहीं हो पाती, यह नये ज़माने का प्यार का विकृत रूप है, वो ज़माने गये जब प्यार निस्वार्थ था, प्यार एक बार ही होता था उस प्यार में या जान जाती थी या प्यार सफल होता था, वो सात जन्मों वाला नाता था. 

प्यार चाहत का व्यापारीकरण मानवता का अन्त है. 
अंत में इंसान जानवरों की श्रेणी में आ जायेगा. 
प्यार चाहत नाम की चीज़ ना रहेगी बाकी, प्यार कुत्ते बिल्ली का खेल हो जायेगा. 

...इति...

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Thursday, May 25, 2023

बेवफाई(Bewfai)

बेवफाई                     
Bewfai
Bewfai
Image from:pexels.com 


रूठे को मनाने की..
कोशिश कभी की नहीं..
क्या गलत था..
क्या था सही..
गर्त में दब गया कहीं..
कच्चे धागे सा..
क्यों टूट गया बंधन..
अब जोड़ों तो भी..
कभी जुड़ेगा नहीं..
गठाण आ गई..
चुभती है कहीं..

अक़्स आईने में..
दिखता था तेरा..
जैसे यही कहीं..
पास हो खड़ी..
मगर आईने में..
दरार ऐसी पडी..
आईना देखने की..
जाती रही घडी..
पीठ पर पड़ी..
बेवफाई की छड़ी..

सावन का सुहाना..
मौसम था दिलकश..
फ़ूलों की खुशबू की..
बहार थी बिखरी हर तरफ..
अचानक आँधी चली..
सब कुछ उड़ा ले गई..
पतझड़ सा मौसम आ गया..
मैं निहारता हूँ..
बाग उजड़ा सा..

स्तंभ हूँ अवाक हूं..
विश्वाश का महल..
देखते देखते कैसे ढह गया..
कौन  किसे क्या कह गया..
मैं अनजान रहा..
बेख़बर प्रतिघात से..
ये अचानक..
कौन घात कर गया..

पुरानी यादों को मारकर..
कब्र पर पत्थर गाड़ कर..
हाथ जोड़ खडा हूँ..
जिन्दगी के नये द्वार पर..
जिन्दगी चलती रहेगी..
रुकेगी नहीं..
हस्ती मेरी कभी भी..
झुकेगी नहीं..

वक्त का पहिया..
सफर पर ले जा रहा है..
नयी दुनिया दिखा रहा है..
वक्त कभी किसके लिये..
रुकता नहीं..
साथ चलो तो ठीक है..
गुजरा वक्त  लौटता नहीं..
इंतजार करना मना है..
वक्त की रफ्तार कई गुना है ..

तेज रफ्तार भागा हूँ..
मंज़िल पर पहुच जागा हूं..
बहुत कुछ पिछे छूट गया..
एक मुसाफिर फिर लूट गया..
किस पर करू यकीन..
किस पर नहीं..
वादे कसमें, प्यार वफ़ा..
खो गई कहीं..

ईश्वर तेरा शुक्र है..
मुझे समय पर जगा दिया ..
मैं विश्वास में खोया था..
तब ही किसी ने दगा दिया..
ईश्वर जरूर इंसाफ करेगा..
सच झूठ साफ़ करेगा..
तुम ना होना शर्मिदा..
अपने गुनाहों पर..
ईश्वर तुम्हें भी माफ करेगा..!! 

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कविता की विवेचना: बेवफाई/Bewfai कविता वफा और बेवफा के बीच एक लकीर खींचती है. 

वफा- सच्चा प्यार, विश्वाश और त्याग है अपने खास चाहने वाले के लिये, जिसके ऊपर दुनिया की हर चीज निछावर उसका दिल मेरा घर जो तेरा है वो मेरा है. 

बेवफा -कुछ भी टिकाऊ नहीं है ,एक व्यापार है, नफा तो मेरा, घाटा तो तेरा, मौका अगर तुमसे बेहतर नपा तुला तो मौके पर धोखा, अब तुम कौन का सवाल, मुझे तो और बेहतर दिल और दिल वाला भा गया, अब तुम जाओ, मेरा दिल और किसी पर आ गया. 

सच्चे प्यार मे बेवफा शब्द ही नहीं होता, सारे दुख दर्द जो तेरे वो अब मेरे, खुशिया तुझ पर लुटानी है जब तक जिंदगानी है. आगे भी जन्मों जन्मों का नाता है, तेरे सिवा मुझे कुछ ना भाता है. 

जन्मों की छोड़ो कुछ दिन ना निभि क्यों मेरी नजर व्यापारी थी, फायदे नुकशान का तोल मोल जारी था, 
तुझ में नुकसान ही नजर आता है, इसलिए अब तू मुझे नहीं भाता है. 

तलाश जारी थी तुमसे कुछ अच्छे की अब मिल गयी है, अब नये सौदे को परखना जारी है, अगर और अच्छा ऑप्शन नहीं मिलता तो तलाश यही खत्म होगी.

 पुरानी यादे भस्म होगीं, यही मन लगेगा, क्यों कि मेरा दिल तो है आवारा ना जाने किस पर आएगा, मगर भाना ही काफी नहीं व्यापारीक फायदा भी होना चाहिये. 

बेवफाई में सब जायज है, क्योंकि प्यार के कोई कायदे नहीं होते एक ही पैमाना है प्यार में जो एक बार किसी का हो गया तो होकर रह गया जन्मों तक ये बन्धन अपने आप में मज़बूत है, क्यों कि यहां तेरे मेरे की रेखा खत्म होती है और हमारे शब्द के साथ मजबूती से जुड़ जाती है जिंदगी अनंत काल के लिये. 

काश बेवफाई ना होती.

..इति..

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Saturday, May 20, 2023

तोड़ दो कसम (Tod do kasam)

Kasam- प्रेम संबंध -कविता 
                     
Tod do kasam
Tod do kasam 
Image from:pexels.com 


तोड़ दो कसम..
जो तुमने खाई है..
हमे भुलाने की..
सुनो, दिल के दरवाजे पर..
दस्तक है हमारे आने की..

जो गिले शिकवे और..
शिकायत है हमसे..
तुम एक बार कहो तो सही..
दिल के सागर में..
लहरे हैं तूफान है..
तुम संग बहो तो सही..

हिम्मत वालों के आगे..
झुकता है आसमान..
तुम प्यार पर गुमान ..
करो तो सही..
नशीब लिखता है ईश्वर..
जो लिखना था लिख दिया..
तुम लिखे को पढो तो सही..

जोड़िया बनती हैं..
आसमान में..
ये अटूट बंधन..
कुदरत की देन है ..
तुम इस बंधन में..
बंधने की हिम्मत..
करो तो सही..

चाहत का गला घोटा ..
जब भी..
नहीं देते राहत..
भौतिक सुख भी..
पश्चात्ताप से भी..
नहीं लौटता वक़्त कभी..
तुम सही गलत का..
आंकलन करो तो सही..

कुछ निर्णय कुदरत के..
मान लेने में ही सुख है..
लहरों के विपरित बहने में..
दुख ही दुख है..
अगर तुमने दुख को..
गले लगाना ठान लिया..
दुख में सुख तलाशने की..
हिम्मत करो तो सही...

दरवाजे दिल के..
खुले रहने चाहिए..
अन्दर की आवाज..
बाहर आनी चाहिए..
कसम कर दे जो..
सारे अरमान भस्म..
ऐसी कसम..
नहीं खानी चाहिये..
गर खाई अहम में..
तोड़ दू क्या..
पूछो तो सही..

वरदान ईश्वर का है..
ये जिन्दगी..
आभार ईश्वर का मान..
करो बंदगी ..
कड़वाहट संताप में..
क्या रखा है.  
जलाओ दिया दिल में..
प्रेम का अमृत सा..
जीवन आनंदमय होगा..
तुम तप में तपो तो सही..!!


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कविता की  विवेचना: 
तोड़ कसम/Tod do kasam कविता दो चाहने वालों की अंतर्मन व्यथा को वर्णित करती है. 

जो आपस में रूठे हैं मगर रूठना नहीं चाहते, एक दूजे से दूर हो टूटे हैं मगर इसे कबूलना नहीं चाहते. 

अहम आ गया आड़े जोश में कसम खा ली भुलाने की मगर भुलाने की जगह यादों ने ले ली, यादों में खोये एक दूजे की दूर होते हुये भी पास से लगते हैं. 

मगर ये नजदीकियां ख़्वाबों ख्यालो में हैं हकीकत में कसम पर कायम है, हमे जरूरत नहीं एक दूजे की लाइन को पक्का कर रहे हैं, भले अकेले में यादों में मर रहे हैं. 

प्यार में सौदा नफा नुकसान आ गया तो प्यार ना हो कर व्यापार हो गया और व्यापार में भावनायें नहीं होती. 

प्यार ईश्वर सा पवित्र है, निस्वार्थ है, जैसा मीरा का श्री कृष्ण से, राधा का श्रीं कृष्ण से, और भी प्यार के कई आदर्श है, हीर रांझा, सोहनी माहीवाल आदि. 

इति..

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Friday, March 24, 2023

वो मैं हूँ (Woh mai hun)

वो मैं हूँ       - प्रेम संदेश-कविता           
Woh mai hun
Woh mai hun
Image from:pexels.com 


किया था तुमने..
जिसके लिये शृंगार..
किया था तुमने..
जिससे मन ही मन प्यार..
वो मैं हूँ..

हवा का झोंका..
जो तेरा आँचल उड़ाता है..
तूफ़ान सा तेरे दिल में..
जो शोर मचाता है..
जिन हवाओ से..
तेरा जिस्म टकराता है..
वो मैं हूँ..

जिसके ख्यालों में..
तुम खोये से रहते हो..
दिल में दबी बात..
जिससे चुपके से कहते हो..
जिसके लिये तुम..
हर तकलीफ सहते हो..
वो मैं हूँ..

भाग्य की रेखाओं में..
जिसे तुम ढूंढते हो..
ज्योतिषों से जिसके बारे में..
तुम पूछते हो..
जिसकी यादों के राज..
छुपे हैं तेरे दिल में..
वो मैं हूँ..

तुम्हारे मन की तमन्ना..
तेरे जीवन का..
कोरा पन्ना..
तेरे लिये सावन का आना..
तेरे द्वारा विरह गीतों का गाना..
जिसको है तुझे पाना..
वो मैं हूँ..

तुम्हारे अंदर से..
जो आवाजें आती हैं..
जिसकी यादे तेरा..
दिल धडकाती हैं..
जिसके स्पर्श से..
सिहरन सी आती है..
वो मैं हूँ..

तेरे जीवन में..
मैं क्यों हूँ मजबूरी..
यादे सिर्फ बाकी हैं..
विरह की लंबी दूरी..
तब भी एक दिया..
उम्मीदों का दिल में जलता है..
तेरा मन जिसकी राह तकता है..
वो मैं हूँ..

मौत ना आ गई होती अगर..
मैं तुमसे मिल लिया होता..
यू ही अकेला..
कब्र में ना सोता..
लगा कर तेरी यादों का गोता..
काश मैं अमर होता..
रूह जो तुझे..
तेरे आस पास होने का..
एहसास कराती है 
वो मैं हूँ..!!

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कविता की विवेचना: 

वो मैं हूँ/Woh mai hun कविता दो दिलों  के मन के अहसासों अरमानो की परिकल्पना है.

दिल में दबे एहसास मन में छुपी बात जो कभी किसी से कह ना सके जिसके बिना जिंदा भी रह ना सके यह कविता स्मरण करती है. 

सच्चा प्यार कभी मरता नहीं, चाहे जिस्म मर जाते हैं मगर प्यार को अमर कर जाते हैं, अमर प्यार की कई कहानिया मौजूद हैं. 

जैसे मीरा का भगवान श्री कृष्ण से निस्वार्थ प्यार, प्रह्लाद का श्री विष्णु भगवान से प्यार, ध्रुव का भगवान से प्यार, लैला मजनूं, हीर राझा,शिरी फ़रियाद इतिहास में अमर हैं. 

"वो मैं हूँ "कविता सच्चे प्यार की परिकल्पना है  आज के भौतिक वादी युग में ऐसा सच्चा प्यार बचा है कि नहीं पता नहीं, हो सकता हो भी मगर ढूढ़ना पडेगा. 

प्यार बना रहे प्यार अमर रहे, प्यार है तो संसार है वर्ना सब बेकार है. 

..इति..
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Tuesday, September 6, 2022

यादें प्यार की (Yaaden pyar ki)

यादें प्यार की - प्रेम त्रिकोण-कविता          
Yaaden pyar ki
Yaaden pyar ki 
Image from:pexels.com 


मिल कर तुमसे..
दिल से खुशी का..
फुहारा निकला..
धडकते अपने दिल को..
देखना चाहा..
धड़कने वाला दिल..
तुम्हारा निकला..

बेचैनी घुटन सी..
रहती है मुझे..
मन मेरा है..
तेरी गिरफ्त में..
मन भी मेरा..
बेचारा,..
आवारा निकला..

कल्पना से..
तेरे चेहरे की..
सिहरन सी उठती है..
सारे बदन में..
सांसे महसूस होती हैं..
तेरी..
ओठों से..
जब नाम..
तुम्हारा निकला ..

यादे तुम्हारी..
तुम्हारे विचारों का..
मन में आना जाना..
आकर्षण तेरी ओर..
सोच में तुम्हें पाना..
यह क्या है..
प्यार या अपनापन..
सोचा कई बार..
प्यार हो सकता है..

मगर तुम तो..
रची बसी थी..
किसी किसी और..
दिल में..
मैं तो सिर्फ..
तुम्हारे लिये..
वक्त गुजारने का..
सहारा निकाला..!!

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कविता की विवेचना: 

यादें प्यार की/ Yaaden pyar ki कविता प्रेमी जोड़ों की मनोदशा को रेखांकित करती है. 

प्रेमी जोड़ों की सारी दुनिया से अलग एक अनोखी दुनिया होती है, जहां सिर्फ उनकी कल्पना और उनका राज चलता है. उनकी इस दुनिया में प्रेमीकिसी और का दखल बिल्कुल नहीं चाहते. 

मगर कभी कभी उनकी इस दुनिया में खुद का दिल कहीं भूल जाते हैं, अपना दिल ढूढ़ने की मशक्कत में अपनी इस दुनिया को बिखेर देते हैं, चाहते किसी और को हैं दिल कहीं और हार देते हैं. 

"प्यार की यादें " कविता में टूटे हुये दिल की दास्तान है, जब कि दिल जानबूझ कर तोड़ा नहीं गया, बस अनजाने में टूट गया और टूटे हुये दिल को कितनी भी कोशिश कर लो जोड़ा नहीं जा सकता. 
पुराना एक गाना याद आता है.."कोई मेरे टूटे हुये दिल से..आज ये पूछे तेरा हाल क्या है.."कोई जब हाल पूछता है तो बहुत सकूं मिलता है, जैसे ज़ख्मों पर मरहम लगा दी हो.

..इति .. 

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Thursday, June 2, 2022

यादें जीवन अमृत (Yaden Jiwan Amrit)

    यादें- Life philosophy कविता          
Yaden jiwan amrit
Yaden jiwan amrit 
Image from:pexels.com 

हांथों में हांथ था..
कितना खूबसूरत साथ था..
यादगार शामें थी..
मनोरम बातें थी..
बनाते थे हम अपनी कल्पना..
की एक अलग दुनिया..

खूबसूरत समा था..
दिलकश लमहा था..
तुम्हारी उमंग भरी सौखिया ..
प्यार और तुमसे नजदीकियां..
यादों को और यादगार..
बनाती हैं..

यादों में खोने का ..
आलौकिक है मजा..
सारी बेचैनी थकावट..
तरावट में बदल जाती है..
जैसे ही तुम्हारी..
कोई बात  याद  आती है ..

गुजर जाता है मेरा समय..
पुराने ख्यालों में खोये खोये..
नीरस जिंदगी में..
यादे जीवन अमृत हैं..
तरो ताजा कर देती हैं..
जीवन को नया जोश ..
और रास्ता देती हैं..

यादों में खोते ही..
मिट जाते हैं उम्र के निशान..
बन जाते हैं फिर हम जवाँ..
ना दुखता है बदन..
और ना दुखता है टखना ..
लगता है जिंदगी का रस..
अभी और है चखना ..

बचपन का लाड प्यार..
और अठखेलियाँ और..
जवानी का प्यार..
इसीलिए होता है..
कि बुढ़ापे में हो..
जिंदगी में नव संचार..
प्यारा लगे यह संसार..

अच्छा लगता है समा पुराना..
मन को भाता है..
इस समय को बार बार दोहराना..
जिंदगी बन जाती है ..
एक खूबसूरत कहानी..
जिसके हीरो हीरोइन हम हैं..
हमारी कहानी  में भी दम है ..

हमारी कहानी को हमने..
कई बार यादों के..
चित्रपटल पर दोहराया ..
अपनी कहानी को..
हमेशा हिट ही पाया..
कहानी बहुत ही अच्छी है.. 
हमारे रोम रोम में बसी है..

हम इस कहानी को ..
याद कर..
भावविभोर हो जाते हैं ..
अपनी अनोखी दुनिया में..
खो जाते हैं..
जिंदगी का आनंद उठाते हैं..
अमर जीवन अमृत पाते हैं..!!

_jpsb blog  

कविता की विवेचना: 

यादें जीवन अमृत/Yaden jiwan amrit कविता उम्रदराज लोगों के लिये लिखी गई है, सुखद मीठी यादें जीवन आधार हैं, हमारी जमा पूंजी प्यार है. 

बुढ़ापे में चिंता फ़िक्र बीमारियो में जकड़ जाये, इससे अच्छा कि पुरानी यादों को दोहराए, जवान बने रहें खुशी से तने रहें, बीमारियाँ उदासिया पास ना फटकेगी.

हम इस जहान से ताल से ताल मिला चल पाएंगे नयी पीढ़ी में हिलमिल जाएंगे, अपनी एक अलग दुनिया बनाएंगे. 

पुरानी यादें जीवन अमृत हैं बुढ़ापे को पास फटक्ने नहीं देती एक अमरत्व का वरदान है, हमेशा एहसास होगा कि हम अभी जवान हैं. 

"यादें जीवन अमृत " कविता यादों का प्यारा गुलदस्ता है, जो नायक  नायिका के जहन में बसता है, यह एक यादगार कहानी है जिसमें प्यार और अमृत की हुयी है बरसात, सराबोर है तन बदन रोम रोम यादों की बहार में. जो जिंदगी को आनंद से भर दे अमर कर दे. 

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..इति..
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Wednesday, June 1, 2022

भूली हुयी पहचान (Bhuli huyi pahchan)

पहचान            -प्रेम कथा-कविता    
भूली हुयी पहचान
भूली हुयी पहचान 
Image from:pexels.com 

तुम एक भूली हुयी..
पहचान हो..
जानते हुये भी मुझे..
बिल्कुल मुझसे तुम..
अनजान हो..

दिल के किसी कोने में..
दबी पडी है तस्वीर तेरी..
सपने में आयी थी तू..
एक बार..
लगा कोई भूली हुयी..
पहचान हो तुम..

दिल से पूछा नाम तुम्हारा..
तो दिल धडक पडा ..
एक्स तेरा अभी भी..
बाकी है दिल के आईने में..

अचानक एक दिन..
दिल में  तूफान उठा..
धूल भरी आँधी चली ..
दिल से तेरे निशान..
उड़ा ले गई..

सुना है किसी और..
दिल की धडकने हैं..
तेरे दिल मे..
किसी ऊंचे महल की 
सजावट हो तुम..

पहचान गया मैं तुम्हें..
गुजरा जब तुम्हारे बगल से..
नाम अधरों पर..
आते आते रह गया..
शायद तुम मुझे भूल गई..

धूल भरी आँधी में..
गुम हो गया मैं..
तुम्हारे मन के आईने में..
धूल के कण..
धुँधला रहें हैं तस्वीर मेरी..


कैसी है तकदीर मेरी..
जिन्दा हूं पर मिट गया हूं..
वक़्त के काल में..
सिमट गया हूँ  ..

मेरी पास थी धुंधली सी..
झलक तेरी..
कौन था मैं समय चक्र में..
हो गया स्वाहा..
ना कोई मेरा निशान..
बाकी रहा..!!

_Jpsb blog 

कविता की विवेचना: 

भूली हुयी पहचान/Bhuli huyi pahchan कविता दो प्रेमियों की कहानी है, जो पहेले प्रेमी थे बाद में प्रेमिका ने बड़ा नाम चुन लिया और प्रेमी को भुला दिया. 

ऐसा भुलाया कि जैसे कभी मिले ही ना हो, प्रेमी को कुछ पूछने या सवाल करने  का मौका ही ना दिया. 
अब पूर्व प्रेमिका ऊंचे रुतबे नाम के साथ घूमती है. 

पुरानी यादे दिल के किसी कोने में दम तोड़ रहीं हैं, कुछ तस्वीरें तोड़ी मरोड़ी सी एल्बम में धूल खा रही हैं. 
क्या हुये वादे कसमें, क्या सब झूठे थे या बिकाऊ थे, महंगे दामों में बिक गए. 

"भूली हुयी पहचान " कविता में वो प्रेमी की पहचान प्रेमिका के लिये रद्दी अख़बार की तरह बेख़बर हो गयी 
प्रेमिका किसी और के ख़यालों में  खो गई, किसी और की हो गई. प्रेम को रद्दी की टोकरी में  डाल दिया. प्रेमी आहे भरने के सिवा कर भी क्या सकता है. 

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