Sunday, November 5, 2023

Papa ki yaad( पापा की याद)

Papa- पिता जी को श्रद्धांजलि-कविता 
I MISS YOU PAPA 
                                
Papa ki yaad
Papa ki yaad
Image from:pexels.com 


एक कमरा था..
पापा के ओज से..
भरा भरा सा..
आवाज आती थी..
कमरे से उनकी  ..
यदा कदा..
खाना पानी और दवा..
या सर दुखता है दबा..

ईश्वर की स्तुति..
उनकी रजा में ही..
संतुष्ट रहने की सहमती..
आज कमरे में..
है खामोशी खाली ..
जैसे खुशियो ने..
नज़र चुरा ली..
कान लगा कर..
सुनता हूं..
शायद बोलेंगे पापा..

कमरा पापा की..
दुनिया का प्रतीक था..
याद किया उन्होंने..
हर पल..
जो उनका अतीत था..
कुच्छ अच्छी बाते..
कुछ अनकही सच्ची बाते..
फ़िर से..
उठ खडे होने की चाह..
ईश मिलन का रास्ता..


आंखे जो उस कमरे में..
जहान देखती थी..
हमेशा सजग..
उम्मीद अनहोनी की..
वो आंखे बंद हो गई..
सदा के लिये..
दुखद अनहोनी थी..


ईश्वर की अराधना..
कुछ बिना मांग की..
वो करते थे प्राथना..
तेरा किया अच्छा लागे..
तेरा भाना सच्चा  लागे..
और थी ना कोई बात ना..

खामोशी और..
ईश्वर से सच्चा प्यार..
और किसी छे की..
उन्हें ना थी दरकार..
बीच बीच में..
स्वजनों को पुकार..
यही था उनका.. 
रोज का अखबार ..

अपना परिवार और..
अपनी बनाई..
पारिवारिक दुनिया..
बिखरा बिखरा सा..
दिखता था कुनबा ..
फिर इकठ्ठा करू..
तिनका तिनका..
शायद मन था उनका ..

एक दिन सबको..
ईश मिलन को..
जाना है..
जिस ईश्वर से..
प्रकट हुए..
उसी में समाना है..
मौत तो एक बहाना है..
पापा भी हुये जुदा..
कहा अनंत काल के लिये..
अलविदा अलविदा..!!

Jpsb blog. 

कविता की विवेचना: -

पापा की याद/ Papa ki yaad कविता एक पुत्र की अपने पापा के प्रति एक वेदना भरी अश्रुपूरित श्रध्दांजली है.

उन्होंने अत्याधिक पीड़ा कष्ट बिना किसी शिकायत के सहे, एक कमरें एक बिस्तर में जीवन के दस वर्ष गुजारे और हमेशा ईश्वर का धन्यवाद ही किया और तेरा भाना सच्चा लागे कह कठिन जीवन जिया. 

काश जीते जी ईश्वर मिल जाता तो मौत को बीच में ना लाता, शायद मौत ही ईश्वर से मिलने की कड़ी है, सारी दुनिया से नाता तोड़ मौत ईश्वर से मिलाती है.

हम अपने के खोने को रोते हैं, मगर सारे जीव ईश्वर के होते हैं,और अपने प्रिय को वापिस बुलाता है, अंत में हम सबका ईश्वर से ही नाता है. 

"पापा की याद " दिल से निकले शब्द हैं जो पलके भिगोते हुये अपने जन्म दाता को दिल की गहराई से याद करते हैं.
जो पापा अनंत काल के लिये ईश्वर की आगोश में चले गये हैं. शायद हमारे लिये ईश्वर के चरणों में जगह बनाने, हमे भी तो वहीं जाना है...

Father's day पर..
पापा  को नम आंखों से श्रद्धांजलि! 


...इति...

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Author is a member of SWA Mumbai .
©️ Copyright of poem is reserved. 




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