Monday, April 18, 2022

आलस्य (leziness)

               
Leziness
Leziness 
Image from:pexels.com 

आलस्य बुरी बलाय..
जो सपनों के महल बनाएं..
नींद से जगते ही ढ़ह जाये ..
जीवन लक्ष्य पाने के  लिए..
कर्म करना जरूरी..
बिना कर्म के हर इच्छा..
रह जाये अधूरी..

कोई भी काम कभी..
कल पर मत टालो ..
जो भी तय किया है..
आज अभी तुरंत ही..
कर डालो..

जो कल करे सो..
आज कर, जो आज करे..
सो अब..
पाछे पस्तायेगा ..
फिर करेगा कब..

कहावत ना  मानी..
तो होगी..
अपने आप से बेईमानी..
सुस्ती एक मीठी बीमारी है..
इसने चुपके से..
सारी खुशिया खा ली हैं..

आलस्य सुनहरे भविष्य..
पर लगा एक ग्रहण है..
कल तक..
अवसर निकल जाएगा ..
आज ही पकड़ ले..
बड़ी मजबूती से..
यही ज़माने की रीत है..
आज मे ही..
 तुम्हारी भी जीत है..

आलस्य से जितनी जल्दी ..
छुटकारा पाओ अच्छा..
वर्ना यह जीवन तहस नहस..
कर देगा, जितना भी बचा..
आलस्य किया जिसने..
बिक गए उसके..
महल चौबारे..
जीवन के लक्ष्य चूक गए सारे..

आलसी को कोई ना पूछे..
फिरते सारी उम्र मारे मारे..
सुस्ती आलस्य को..
जितनी जल्दी मिटा डालो ..
इसे मिटते ही..
जिंदगी के सारे सुख पा लो..
तुम्हारे सपने और लक्ष्य..
सब पूरे होंगे जल्द ही..
और मिलेगा..
जिंदगी जीने का अनूठा मज़ा भी..!!

_JPSB 

कविता की विवेचना: 

आलस्य/Leziness कविता _ सुस्ती, आलस्य अंग्रेजी में Leziness जो कि इंसान में स्वाभाविक पाया जाता है, एक मीठा नसा है जो कि जब तक अपनाये रखो आनंद देता है.

मगर यह मीठे नसे सा आनंद कब  धीरे से मीठा जहर बन जाता है पता ही नहीं चलता. 

अगर इस मीठे ज़हर से जल्दी सुटकारा नहीं पाया गया तो यह धीरे धीरे सुनहरे भविष्य को निगलना सुरू  कर देता है. 

कब  जिंदगी का सत्यानाश हो जाता है पता ही नहीं चलता, और जब पता चलता है बहुत देर हो चुकी होती है. सुस्ती आदत में सुमार हो चुकी होती है.  

फिर भी पक्के इरादे से सुस्ती से छुटकारा पाया जा सकता है,  थोड़ा कष्ट शुरू में होगा मगर छुटकारा मिलने के बाद सब अच्छा ही होगा. 

यह एक बिमारी है जितनी जल्दी इससे निजात मिले अच्छा है जिंदगी सुहानी हो जाएगी. 

"आलस्य " कविता सुस्ती/Leziness के जिंदगी पर दुष्प्रभाव को रेखांकित और उजागर करती है, सुस्ती se लगाव या प्यार अपने आप को धीमी मौत मारना है, इससे बचना चाहिए. 

कृपया कविता को पढे और शेयर करें.

  ...इति...

Jpsb 

jpsb.blogspot.com 

Author of poem is member of SWA Mumbai 
Copy right of poem is reserved. 

Poem can be Translated in any language by Google  translate. 




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