Saturday, July 25, 2026

कॉकरोच ( Kackroch)

छात्रों के द्वारा delhi में मौजूदा विरोध प्रदर्शन, उनकी पीड़ा और भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को शामिल करके यहाँ कॉकरोच कविता में विस्तार दिया गया है:

KACKROCH-A Hindi Poem on Student protest

Kackroch
Kackroch Protest
Image Created by:GemineAI












​जज साहब ने आकलन किया,
छात्रों को कॉकरोच कह दिया।
कॉकरोच अपना हक मांगने लगे,
लगता है उन्हें वो गए ठगे।

​उनके भविष्य का हो रहा सौदा,
मुरझा रहा बचपन रूपी पौधा।
इनके भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़,
सुन ले अंधी-बहरी सरकार इनकी पुकार!

​सड़कों पर आज उतरे हैं वो युवा,
जिनके सपनों का हर पन्ना हुआ धुआँ ,
धांधली, पेपर लीक..
और भ्रस्टाचार  की मार,
कब तक सहेगा देश का होनहार?

​हाथों में तख्तियाँ,
आँखों में अश्क और ज्वाला है,
यह सिर्फ विरोध नहीं,
समझे बात सरकार, 
छात्र मांग रहे अपना अधिकार ..

हक की लड़ाई ही आजादी है।
सरकार की अव्यवस्था ने ही,
यह स्थिति ला दी है,
​लाठियाँ की बौछार,
आशु गैस की मार,
नन्हें मासूम बच्चे बच्चियों का ..
क्यों रहे सर फाड़ ..

जुल्म अंग्रेजों सा अपनों से ..
सह कर भी न्याय की उम्मीद ,
उन्होंने नहीं छोड़ी है ..
सरकार अपनी है ,
अंग्रेजों की थोड़ी है ..
करो बच्चों से अच्छा व्यवहार..

शिक्षा का व्यापार ना होने दे ,
सपने मासूमों के नीलाम ना होने दे ,
छात्र नीव है इस देश की ..
इसे कमजोर ना होने दे,
ना बिछाये कांटे इनकी राह में..
इन्हें सुनहरे  सपनों में खोने दे ..

​कोचिंग माफिया चारो ओर..
और दलालों का जाल है,
मेहनती छात्रों का आज बुरा हाल है।
डिग्रियाँ बिक रही हैं क्या मोल ?
प्रतिभाएँ रो रही भविष्य डावं डोल ..

स्कूल धडा धड बंद कर ..
व्यवस्था चैन की नींद सो रही है।
बच्चे किये शिक्षा से वंचित..
ताज्जुब कोई नहीं चिंचित..
कह रहे अनपढ़ भारत होगा विकसित..

विश्व गुरु होने का सपना..
बिना शिक्षा के कैसे होगा अपना..
क्या यह किसी ने विचारा है..
या यह सिर्फ एक खोखला नारा है..
नारे को सार्थक करें ..
शिक्षा सुधार ईमानदारी से करे..

अभी भी समय है..
हुक्मरान होश में आएं,
युवाओं के जनाक्रोश को समझ जाए..
और राजनीति से उठकर..
सार्थक कदम देशहित में उठाये..
अपने भारत देश को महान बनाये..!!!
जय हिंद!

Jpsb blog 



भारत शिक्षा सुधार का अब एक ही नारा हो:
उत्तम शिक्षा का अधिकार हमारा हो..

• ​शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाज़ारीकरण पूरी तरह बंद हो!
• ​आज़ाद भारत में हर नागरिक के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बिल्कुल मुफ्त या नाममात्र (न्यूनतम) खर्च पर उपलब्ध हो!
​जब पढ़ेगा देश का हर बच्चा बिना किसी आर्थिक बोझ के,तभी सही मायने में भारत महान और सशक्त बनेगा।



कविता की विवेचना:-

Kackroch (कॉकरोच) कविता भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, बाज़ारीकरण और युवा पीढ़ी के न्यायपूर्ण संघर्ष का एक अत्यंत संवेदनशील और आक्रोशपूर्ण खाका खींचती है। 

"कॉकरोच कविता "की शुरुआत न्यायपालिका की टिप्पणी Kackroch से होती है, जो छात्रों के आक्रोश की तात्कालिक वजह बनती है।

 कवि ने बहुत ही मार्मिक ढंग से दर्शाया है कि कैसे धांधली, पेपर लीक, कोचिंग माफिया और दलालों के तंत्र ने होनहार युवाओं के सपनों को धुएँ में बदल दिया है।

​कॉकरोच कविता की मुख्य संवेदनाएँ एवं संदेश:-

• ​सड़कों पर उतरा आक्रोश: "कॉकरोच कविता" सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के जज्बे को सलाम करती है। लाठियों आंसू गैस पानी की बौछारों के बीच भी उनका यह संघर्ष सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।

• ​शिक्षा का बाज़ारीकरण: "शिक्षा कोई व्यापार नहीं" पंक्तियों के माध्यम से कवि ने उस व्यावसायिक तंत्र पर कड़ा प्रहार किया है जहाँ चंद रुपयों के खातिर प्रतिभाओं का सौदा होता है और डिग्रियाँ नीलाम की जाती हैं।

•  ​समाधान और दृष्टि:"कॉकरोच कविता "केवल समस्या को नहीं रेखांकित करती, बल्कि इसका अंत भारत में एक बुनियादी और क्रांतिकारी सुधार के नारे के साथ होता है!

"मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा"। जब देश का हर बच्चा बिना आर्थिक बोझ के पढ़ेगा, तभी वास्तविक अर्थों में भारत सशक्त बनेगा।

​विम्बों और भाषा की दृष्टि से "कॉकरोच कविता" में "मुरझा रहा बचपन रूपी पौधा" तथा "आँखों में अश्क और ज्वाला" जैसे प्रयोग कविता को गहरा और प्रभावशाली बनाते हैं।

​लेखक का कविता लिखने का उद्देश्य:-

​"कॉकरोच कविता" को लिखने का मुख्य उद्देश्य देश की लचर और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को आवाज़ देना है। 

कवि शासन-प्रशासन (हुक्मरानों) और समाज का ध्यान छात्रों की पीड़ा, पेपर लीक, कोचिंग माफिया तथा शिक्षा के बढ़ते बाज़ारीकरण की ओर आकर्षित करना चाहता है।

इसके साथ ही, "कॉकरोच कविता "युवाओं में न्याय के प्रति उम्मीद जगाने और हर भारतीय नागरिक के लिए मुफ़्त व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वकालत करने के लिए रची गई है।

छात्रों को Kackroch कहना वो भी भारत की संविधान रक्षा करने वाली संस्था द्वारा,  युवाओं और देश के भविष्य साथ घृणित मज़ाक है!

आखिर  इनका सार्थक जवाब हमारे देश की इसी संस्था,संसद और सिस्टम को जिम्मेदारी से देना चाहिये.
यही Kackroch कविता का संदेश और आग्रह है .

याद रहे आप भी कभी युवा थे,  युवाओं को आशीर्वाद प्यार और स्नेह के साथ सही मार्गदर्शन और शिक्षा का अधिकार दे ,यही उनका मूल भूत हक है..
कृपया कविता पढे और शेयर करें. 

...इति 


Jpsb blog
 jpsb.blogspot.com 
Author is a member of SWA Mumbai
Copy write of poem is reserved. 

No comments:

Post a Comment

Please do not enter spam link in the comment box

Recent Post

जीत तुम्हारी (Jeet Tumhari)

जीत तुम्हारी: A Motivation Poem  उत्साह वर्धन कविता     Jeet tumhari Image Created by:GemineAI  जब जिन्दगी में.. सब गलत होता है.. कोई राह मे...

Popular Posts