जीत तुम्हारी: A Motivation Poem
उत्साह वर्धन कविता
जब जिन्दगी में..
सब गलत होता है..
कोई राह में..
रोड़े अटकाता है..
जब भाग्य..
रास्ता रोक..
खडा हो जाता है..
जब पैसे..
जेब में नहीं होते..
छोटी छोटी..
चीजों के लिये तरसते हैं ..
अपनी इच्छाओं को..
करते दफ़्न..
ओढ लेते कफन..
दिल में सहते..
कई ज़ख़्म..
दोस्त यार रिश्तेदार..
पूछते कैसे हो..
एक चुपी और ..
कमजोर मुस्कान..
चेहरे लायी जाती..
और लुप्त हो जाती..
मन कहता खुद से..
अपने आप से..
लड रहा हूँ..
सपने पकड़ रहा हूँ..
सारे प्रयास असफल..
होता सफलताओं का..
रोज़ कत्ल..
उम्मीदो पर पानी फिरता..
परेशान इंसान..
चारों ओर से घिरता..
जिस रास्ते जाता..
बीच में गड्ढा आता..
सिर पकड़ रह जाता..
हिम्मत ना हारो..
अपने ईश्वर को पुकारो..
वो तो हमेशा..
तुम्हारे साथ है..
उनका तुम्हारे सिर पर..
हमेशा हाथ है..
अंधेरी रात के बाद..
सवेरा जरूर होगा..
करो विश्वाश..
सफ़लता तुम्हारे..
कहीं आस पास ही है..
फिर क्यों उदास है..
विजय का तोहफ़ा..
जल्द तेरे हांथ में होगा..
इंतजार करो आज़..
तेरे ही सिर पर होगा ताज़..
यही तो है..
हार को जीत में..
बदलने का अंदाज..
असफ़लता बस..
एक बड़ी सफलता..
मिलने की निशानी है..
जो आज नहीं तो कल..
जरूर आनी है..
यह बात सब ने..
शदियों से मानी है..
फिर किस बात का रोना..
आग में तप कर ही..
बनता है खरा सोना..
जब मंजिल..
दूर और कठिन..
नजर आती है..
रुको मत-झुको मत..
रुको मत..
मंजिल की ओर बढ़ो..
संघर्ष और तेज़ करो..
अपने आप को परखो..
समझो..
तुम जीत के बहुत करीब हो..
आखिर तुम्हारी..
मेहनत रंग लाई..
किस्मत ने ली अंगड़ाई..
विजय रथ..
तुम्हारे सामने खडा है..
तुम्हारी उम्मीद से..
बहुत बड़ा है..
जीत का जश्न मनाओ..
सारी पीड़ाओं को..
अब भूल जाओ सदा के लिये..!!
🥀Jpsb blog
कविता की विवेचना :-
'जीत तुम्हारी' (Jeet Tumhari)कविता जीवन के गहन संघर्ष, निराशा और अंततः विजय की एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी यात्रा को दर्शाती है।
कवि ने कविता को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया है: परिस्थिति, संघर्ष और सफलता।
प्रारंभिक पंक्तियों में जीवन के कठिन दौर का सजीव चित्रण है—जब आर्थिक तंगी होती है, सपने टूटते हैं, अपनों के सामने झूठी मुस्कान पहननी पड़ती है और हर प्रयास निष्फल प्रतीत होता है।
'इच्छाओं को दफ़्न करना' और 'कफ़न ओढ़ना' जैसे बिंब संघर्ष की चरम सीमा और मानसिक पीड़ा को दर्शाते हैं।
इसके बाद कविता में एक सकारात्मक मोड़ आता है, जहाँ कवि ईश्वर में अटूट विश्वास, धैर्य और निरंतर प्रयास का संदेश देता है।
"आग में तप कर ही बनता है खरा सोना" जैसी पंक्तियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि जीवन की चुनौतियाँ हमें तोड़ने नहीं, बल्कि निखारने आती हैं। कवि का मानना है कि असफलताएँ वास्तव में एक बड़ी सफलता की पूर्वपीठिका होती हैं।
अंतिम पंक्तियों में संघर्ष का सुखद परिणाम दिखाई देता है। मेहनत रंग लाती है, किस्मत बदलती है और व्यक्ति जीत के रथ पर सवार होता है। यह कविता हर गिरकर उठने वाले इंसान की अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव मनाती है।
कविता लिखने का कवि का उद्देश्य:-
इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य हतोत्साहित और निराश मन में आशा की नई किरण जगाना है।
कवि समाज के उस वर्ग को संबोधित कर रहा है जो जीवन की विषमताओं, आर्थिक तंगी और बार-बार मिलने वाली असफलताओं से टूट चुका है।
कवि का उद्देश्य पाठक को यह अहसास कराना है कि संघर्ष जीवन का स्थायी भाव नहीं है, बल्कि यह सफलता से ठीक पहले की परीक्षा है।
वह मनुष्य को सिखाना चाहता है कि कठिन समय में अपनी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और ईश्वर पर विश्वास रखते हुए प्रयास जारी रखने चाहिए।
कवि हमें समझाता है कि असफलता से डरने की बजाय अपने संघर्ष को और तेज़ करना चाहिए, क्योंकि अंधेरी रात के बाद ही सुनहरा सवेरा आता है। संक्षेप में, कवि हर गिरते हुए व्यक्ति को उठाकर उसे उसकी असीम क्षमताओं और अंतिम विजय का ध्यान दिलाना चाहता है।
"जीत तुम्हारी " कविता का सार-
संघर्षों की आँच में तपकर, तू सोना बनके उभरेगा,
धैर्य रख ऐ मुसाफ़िर, कल ताज तेरे ही सिर सजेगा!
कृपया कविता को पढे और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.
...इति
🥀Jpsb blog🥀
jpsb.blogspot.com
Author is a member of SWA Mumbai .
Copyright of poem is reserved .
