Monday, November 17, 2025

भारत चमकता तारा (Bharat Chamkata Tara)

Chamkta tara - देश भक्ती कविता 

Bharat chamkta tara
Bharat chamkta tara
                
                Image generated by: what app meta


 अब नया सवेरा आया है,
 उजियारा छाया चारों ओर 
 भारत फिर जग का सिरमौर, 
 सुनो गूँजता जयघोष हर ओर।

ना भ्रष्ट हाथों की जंजीरें,
ना रिश्वत की कोई दीवार,
ईमान की गंगा बही है, 
सच्चाई का सागर अपार ,

 रोशनी  से  जगमगाता ,
गाँव का हर कोना, 
कृषक के खेतों में सोना, 
मेहनत से रंग नया मिला,
ना भूख, ना बेरोज़गारी,
खुशहाल है हर जिला ..

 हर चेहरे पर मुस्कान,
शिक्षा, स्वास्थ्य, और सम्मान, 
यही है अब पहचान,
दिल्ली से लेकर कन्याकुमारी, 
हम सब हैं एक जान..

एकता का ये संगम है,

जहाँ हर जाति, हर भाषा में, 
तकनीक में, विज्ञान में,
चाँद और मंगल की धरती पर, 
भारत आगे है ज्ञान में..

नारी का अब गौरव बढ़ा,

हर बच्चा सपनों की मंजिल चढ़ा ,
भारत अब कर्मभूमि बनकर, 
हर नगर, हर बस्ती बोले,
हम हैं नव भारत के शोले...

अतिथि जो आए दूर देश से, 

कह दे मन से ,
ज्ञान, कला और संस्कृति के, 
दीपक भारत में जगमगाएँ ,
विश्व प्रसिद्ध भारत की कलाएं, 

सद्भावना, प्रेम, और शांति का,

धरती यह स्वर्ग समान बना, 
भारत भाग्य विधाता,
धन्य हो गये हम, 
इस देश ने जन्म से हमे चुना, 

विज्ञान का दीप जला,
अब ये आलम है,चला..
लगातार तरक्की का सिलसिला, 
 हम सबसे आगे हैं आज,
यही है बुलंद तिरंगे का राज।

अब न कोई अमीर, न गरीब, 
सबको मिले अधिकार समान,
 हर दिशा में सबका बढ़ा मान।
 हर बच्चा  यहाँ  अब पढ़ता ,
 भविष्य अपना गढ़ता है,

जग को राह दिखाता है भारत।
हरित क्रांति से नीली क्रांति तक, 
हर खेत में नव जीवन है,
 “हम सबके दिल में  है भारत ”

नतमस्तक हो जाए यहाँ,
 स्वर्ग यही है, यही जहान।”
सड़कों पर खुशबू प्रगति की, 
गगनचुंबी इमारतें गाएँ,
हम आ गये कहाँ..

मानवता का प्यारा तारा,
 जग में सबसे उजियारा।
हर भारतवासी गर्व करे अब, 
“ये भारत देश हमारा”

 यही हमारा सच्चा यथार्थ रूप,
अपना भाग्य स्वयं लिखा,
 नव भारत ने विश्व जीता ,
भारत वासी आनंद में जीता है!!!

कविता की विवेचना: 

भारत चमकता तारा/Bharat Chamkta Tara कविता भारत की अभूतपूर्व प्रगति की कल्पना की 
एक उड़ान है, जो लेखक ने चित्रित की है. 

 भारत की आज़ादी के बाद से हर भारत वासी भारत 
को एक विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में देखना चाहता है, 
जैसे अमेरिका कनाडा आदि देश हैं. परंतु क्यों हमारा सपना पूरा नहीं हो पाया, जबकि सारी समर्थ हम में 
है. 

क्या हमारे राजनेता नहीं कर पा रहे, क्या उनका स्वार्थ 
सिर्फ सता हथियाने तक है, क्यों नहीं मिटा भ्रष्टाचार 
क्यों नहीं शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य विश्व स्तरीय और फ्री, क्यों बेरोजगारी गरीबी ज्यादा, क्यों नहीं करते नेता पूरा अपना वादा. 

क्यों पूंजीवाद का राज है, क्यों पिछड़ा समाज है क्यों नहीं सबको आजादी का अधिकार, क्यों अधिकार मांगने पर पुलिस रही है मार, अंग्रेजो के ज़माने जैसी पुलिस क्यों है. 

"भारत चमकता तारा "हो हर भारत वासी की तमन्ना है 
भारत को एक ना एक दिन ये बनाना है, कोई महापुरुष
आयेगा एक दिन बन सच्चा भारत माँ का सपूत ,जो करेगा सपना यह सच. लेखक को इंतजार है,आप भी उम्मीदें जिंदा रखो. रियल राम राज आएगा एक दिन. 

....इति...

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www.jpsb.blogspot.com
Writer is member of SWA Mumbai
 Copyright of poem is reserved 


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