Tuesday, January 25, 2011

यह किस से कहा जाए..?


To Whom It should address ……? 
यह किस से कहा जाए....?
To whom it should address
Yeh kis se kaha jaye
Image from :Times of India

कब तक सहा जाए ...
यह किससे कहा जाए...

जिन्हे वोट दिया चुना...
उन्होंने आंखे मूंद ली...

सुनता नहीं कोई ..
कहते है आज़ादी है..

आज़ादी मिली चंद लोगो को...
अमीरों राजनेताओं को...

जनता ने आज़ादी का स्वाद ना चखा..
अंग्रेज चले गए कही नही पता चला...

ना अच्छी शिक्षा ना स्वाथ्य का पता..
इन सबका भी ववसायी करण हुआ...

महंगे स्कूल कालेज महंगे अस्तप्ताल...
सब ओर अमीरों का मायाजाल...

गरीबी भुखमरी की कौन करे पड़ताल...
गरीबों का सिर्फ भगवान ही मालिक...

भेड़ बकरियां और गरीब इस्तेमाल की चीज..
कुछ खाने के लिए कुछ वोट पाने के लिए...!!

यह किससे कहा जाए…?

Ram bharose
Yah kis se kha Jaye
Image from:pexels.com

क्या यह सच है कि भारतीय शीर्ष प्रशासक डिवाइन पावर (राम भरोसे) पर निर्भर हैं। क्या यह देश के शीर्ष प्रशासकों को जानकारी  है कि सब्जियों, दालों, आवास, शिक्षा जैसी सभी चीजों की कीमत केवल एक वर्ष में 4 गुना बढ़ जाती है। कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं: विशेष रूप से कीमत 1 वर्ष से पहले (रु। में) वर्तमान में (रु। में) मूल्य। 25.00 से 90.00 चावल 12.00 से 32.00 गेहूं 8.50 से 19.00 खाद्य तेल 35.00 से 90.00 फ्लैट दर 800 / वर्ग। फीट से 3200 / वर्ग। फीट। फीस 25,000 / वर्ष। से 80,000 / वर्ष सरकार को केवल अपनी चिंता है, उन्होंने M.P. के वेतन में 4 गुना वृद्धि की, सरकार के कर्मचारियों के वेतन में 6 वें वेतन आयोग ने 3 गुना वृद्धि की। लेकिन सरकारी कर्मचारी के अलावा अन्य लोगों के बारे में क्या है, वे कई आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। शिक्षा शुद्ध वाणिज्यिक व्यवसाय बन गई, सरकार ने निजी संस्थानों को फीस बढ़ाने, दान लेने, निजी ट्यूशनों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूल / कॉलेजों में कोई अध्ययन नहीं करने के लिए मुफ्त हाथ दिया है। अब एक दिन गरीब आदमी, यहां तक ​​कि मध्यम वर्ग के लोग भी अपने बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में शिक्षित करने की कल्पना नहीं कर सकते हैं। प्रत्येक और हर आइटम की बढ़ती दरों में 4 गुना, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के लोग जो निजी नौकरियों / अन-ऑर्गनाइज्ड Secter में हैं, वे उसी तरह कमाते हैं जैसे वे 3 साल पहले कमाते थे।



दूरदर्शन में RBI का विज्ञापन जो मैंने देखा था, "हम लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित करते हैं - हम हर दिन आम लोगों के जीवन को छूते हैं।" जो मजाक जैसा लगता है। । सरकार कागजों पर योजनाओं की घोषणा करती है लेकिन आम आदमी की पहुंच से परे है। उदाहरण के लिए - सरकार शिक्षा ऋण पर इंट्रेस्ट सब्सिडी शुरू करती है, लेकिन यदि बैंक, बैंक मैनेजर या संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जाती है या इनकार करते हैं। योजनाओं का प्रभावी निहितार्थ भी आवश्यक है और इसके शासन का हिस्सा भी है। "गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इस स्वतंत्र देश में सेवा करने के लिए बहुत कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं - क्यों?" Pl.do something मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाए यह बहुत अधिक है जो मैंने अपने जीवन काल में देखा है।
Poor School Girl
Poor school girl
Image from: pexels.com


 कुछ सुझाव सही तरीके से लागू  कर स्थिति को सुधार सकते हैं: - थके हुए मंत्रियों को हटा दें, खुदरा सब्जियों के लिए कॉरपोरेट घरानों की ज़िम्मेदारी रद्द करें, तत्काल प्रभाव से किराना, खाद्य पदार्थों के प्रतिबंध वस्तुओं का व्यापार, स्टॉक की सख्त जाँच करें, विशेष रूप से कॉरपोरेट घरानों के गोदामों की जो खाद्य पदार्थ की खुदरा बिक्री में संलग्न हों, आवश्यक खाद्य पदार्थों पर सब्सिडी दें, समय पर आयात की जाने वाली खाद्य सामग्री का बहिष्कार करें, एफसीआई की भंडारण क्षमता और क्षमता में सुधार करें, उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को तकनीकी, वित्तीय और नैतिक समर्थन दें, थोक खरीद के लिए कॉर्पोरेट घरानों को बैन कर दें , कुछ आइटम्स। सामान्य व्यवसाय / कॉरपोरेट घरानों को कॉमन कमोडिटी बिज़नेस करने के लिए, विशेष ट्रेड बिज़नेस के लिए रिस्ट्रिक करें
 
आम आदमी, शिक्षा क्षेत्र का पूरी तरह से राष्ट्रीयकरण करें, शिक्षा क्षेत्र में व्यवसाय को प्रतिबंधित करने और निजी शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालयों का राष्ट्रीयकरण करें, सरकार के सुधारों को सुनिश्चित करें कॉन्वेंट लेवल शिक्षा सरकारी स्कूलों में हो सुनिश्चित करे ,ट्यूशन कल्चर को समाप्त करने के लिए स्कूल एडमिशन में सुधार करे नई शिक्षा नीति बनाए
 नई कृषि नीति बनाएं।उच्च प्राथमिकता पर कृषि सुधार करें।

  क्या यह देश के शीर्ष प्रशासकों को पता है कि सब कुछ जैसे सब्जियों, दाल, आवास, शिक्षा की कीमत केवल एक वर्ष में 3 गुना बढ़ जाती है। कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं: विशेष रूप से कीमत 1 वर्ष पहले (रुपये में)। वर्तमान में (रु। में) मूल्य। 32.00 गेहूं 8.50 19.00 फ्लैट दर 800 / वर्ग। फीट 2,500 / वर्ग। फीट। शुल्क 35,000 / वर्ष। 80,000 / वर्ष

 सरकार को केवल अपनी चिंता है, उन्होंने M.P. के वेतन में 4 गुना वृद्धि की, सरकार के कर्मचारियों के वेतन में 6 वें वेतन आयोग ने 3 गुना वृद्धि की। लेकिन सरकारी कर्मचारी के अलावा अन्य लोगों के बारे में क्या है, वे कई आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। शिक्षा शुद्ध वाणिज्यिक व्यवसाय बन गई, सरकार ने निजी संस्थानों को फीस बढ़ाने, दान लेने, निजी ट्यूशनों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूल / कॉलेजों में कोई अध्ययन नहीं करने के लिए मुफ्त हाथ दिया है। अब एक दिन गरीब आदमी, यहां तक ​​कि मध्यम वर्ग के लोग भी अपने बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में शिक्षित करने की कल्पना नहीं कर सकते हैं। प्रत्येक और हर आइटम की बढ़ती दरों में 3 गुना, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के लोग जो निजी नौकरियों में हैं, वे उसी तरह कमाते हैं जैसे वे 3 साल पहले कमाते थे।
To whom it should address 2
Rich & Poor Gap
Image from :pexels.com

 दूरदर्शन में RBI का विज्ञापन जो मैंने देखा था, "हम लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित करते हैं - हम हर दिन आम लोगों के जीवन को छूते हैं।" जो मजाक जैसा लगता है। । सरकार कागजों पर योजनाओं की घोषणा करती है लेकिन आम आदमी की पहुंच से परे है। उदाहरण के लिए - सरकार ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण पेश करती है, लेकिन यदि बैंक में पूछताछ की जाती है, तो बैंक प्रबंधक या संबंधित व्यक्ति इनकार या इनकार कर देता है। योजनाओं का प्रभावी निहितार्थ भी आवश्यक है और इसके शासन का हिस्सा भी है। “गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को इस स्वतंत्र देश में जीवित रहने के लिए बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है - क्यों… ???

.. इति...
_जे पी एस बी 
jpsb.blogspot.com







Sunday, August 22, 2010

गवर्नेंस (Governance)

गवर्नेंस/Governance



MP की 5 गुना सैलरी हाइक, साल में 4 बार महंगाई, साल में 4 बार महंगी हुई बात ... हाउसिंग, किराणा एजुकेशन खर्च, Govt कर्मचारी को 6th पे कमीशन मिला .... गरीब लोगों का क्या, प्राइवेट कर्मचारियों की उनकी इनकम समान है 3 साल पहले क्या था, इन लोगों का पर्सेंटेज विशाल है और सरकार के
Poor became poorer
Poor became Poorer

कर्मचारियों और सांसदों से अधिक है, वे कैसे जीवित रहते हैं।किसी ने कभी नहीं
सोचा इनके बारे में , क्या सरकार इनको देश वासी नही समझती है।

क्या यह देश केवल १०% लोगों का है, जो पहुंच या सत्ता में हैं, वे अपने लिए चीजों का प्रबंधन करते हैं, इन १०% के अलावा बड़ी आबादी के बारे में क्या है, जहां शासन के नाम पर केवल अव्यस्था है।

 यह अविसनीय है कि कीमतें वर्ष के भीतर ३ से ४ गुना बढ़ जाती हैं।मगर लोगों की आमदनी वही रहती है जो चार वर्ष पहले थी।

सरकार को सबसे पहले आर्थिक रूप से सबसे कमजोर नागरिक की मिनिमम आमदनी निर्धारित करनी चाहिए और उस मिनिमम वेज का कानून बनाकर सख्ती से लागू देश भर में करना चाहिए।

 सबसे गरीब आदमी की आमदनी बढ़ेगी तो बाजार में पैसा आएगा ओवरऑल हमारे देश की समृद्धि बढ़ेगी देश की आर्थिक तरकी होगी और गरीब आदमी का जीवन स्तर सुधरेगा बेरोजगारी कम होगी साक्षरता दर में बढ़ोतरी होगी ।

 यह सब सरकार को भी पता है फिर इसे लागू क्यों नही करते , क्यों गरीब को गरीब रखना चाहते है इससे देश का तो नुकसान ही होगा, फिर इस प्रकार हो रहे नुकसान क्यों नही रोका जाना चाहिए ।

मैंने विज्ञापन देखा है। डीडी पर आरबीआई "हम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करते हैं / जब तक हम मूल्य बढ़ोतरी को नियंत्रित करते हैं" आम आदमी के साथ मजाक लगता है। 

कौन इस देश के शीर्ष प्रबंधन और देश के शीर्ष थिंक टैंक को बताएंगे। कृपया अच्छी तरह से प्रबंधित करें और आम लोगों के बारे में भी सोचें।

नीचे कुछ प्वाइंट लेक ऑफ गवर्नेस को इंगित करते हैं।

Lack of Governance:

1 अल्प समय की अवधि में उच्च मुद्रास्फीति

2. गैर-मानक शिक्षा प्रणाली और शिक्षा परिणाम के व्यावसायीकरण के परिणामस्वरूप अब आम और गरीबों के लिए कोई उच्च शिक्षा नहीं है।

3. हाऊसिंग और लैंड नक्सल ने रिहायशी मकानों की कीमतों में पांच गुना तक की वृद्धि की और अब कोई भी घर मीडियम क्लास और गरीब के लिए नहीं है।

4. जाति और क्षेत्रीयता की राजनीति जो राष्ट्रीय एकीकरण के लिए खतरनाक है लेकिन सरकार द्वारा प्रयासों की कमी है। इसका प्रतिरोध करना।

 5. गरीबी हटाने के लिए कोई प्रभावी कार्यक्रम नहीं।


6. समृद्ध तेजी से अमीर हो रहे हैं और गरीब  और गरीब की ओर बढ़ रहे है।

महंगाई बढ़ने के
Poor Rich Gap
Gap between poor Rich
Image from :pexels.com


कारण: -
  1. मुद्रास्फीति के लिए कॉरपोरेट घरानों पर निर्भरता, जैसे रिलायंस मॉल , बिग बाजार या ऐसे मॉल।
               
  2. जमाखोरी, अत्यधिक धन शक्ति वाले समृद्ध कॉर्पोरेट घरानों द्वारा ज्यादा खरीद कर जमाखोरी

  3. सरकार के गोदामों की कमी। (पिछले साल गेहूं और चावल खुली जगह में स्टोर होने के कारण खराब हो गए)

  4. उच्च प्रोफ़ाइल राजनीतिज्ञ द्वारा गैर जिम्मेदाराना बयान।

  5. प्रभावी कृषि नीति का अभाव। 



_इति..

_जे पी एस बी
jpsb.blogspot.com

Monday, July 26, 2010

मेरे बारे में(About Me)



मेरे बारे में :स्वयं के स्वभाव से प्रेरित कविता 

Mere bare me
Mere bare me
Image from:Self Created
                       



मैं पूरी दुनिया को अपनाना चाहता हूं

मैं सबको अपना बनाना चाहता हू...

एक मुस्कान इशारा ही काफ़ी है...

तुम्हारा हो जाऊंगा सदा के लिए...

क्यों कि यह मेरे स्वभाव में है...


कोई काम बताकर तो देखो..

कोई इच्छा जताकर तो देखो...

पूरा करने के लिए जान लगा दूंगा...

क्यों कि यह मेरे स्वभाव में है...


एक बार किसी का हो गया अगर..

सारी उमर रिश्ता निभाउंगा...

चाहे कितनी भी रूकावटे आएं...

क्यों कि यह मेरे स्वभाव में है...

 

तुम मुझे भूल जाओ कभी..
मैं बार बार याद दिलाने आऊंगा...

मैं कभी न भूल पाऊंगा...

क्यो कि यह मेरे स्वभाव में है...!!


Main puri duniya ko apana chahta hun.. 

Main sabko apna banana chahta hun..

Ek muskan ishara hi kafi hai..

Tumhara ho jaunga sada ke liye..

Kyu ki yah mere swabhav main hai..


Koi kaam bata kar tou dekho..

Koi  ichha jatakar tou dekho..

Pura karne ke liye Jaan laga dunga..

Kyu ki yah mere swabhav main hai..


Ek bar kisi ka ho gaya agar..

Sari umar rista nibhaunga ..

Chahe kitni bhi rukawate aayen..

Kyu ki yah mere swabhav main hai..


Tum mujhe bhul jao kabhi..

Main bar bar yaad dilaunga..

Main kabhi na bhool paunga..

Kyu ki yah mere swabhav mai hai..!!


_जे पी एस बी 

कविता की विवेचना: 

मेरे बारे में/ About Me कविता में लेखक ने अपने बारे में कुछ भावनाएं व्यक्त की हैं।

लेखक पूरी दुनिया के कल्चर को जानना और अपना बनाना चाहता है।अर्थात लेखक चाहता की धर्म ,भाषा ,जात, पात,और देशों की सीमायो के नाम पर लड़ाई झगड़े बंद हो और पूरे विश्व के लोग चाहे किसी भी भाषा धर्म के हों ,किसी भी जात के हों सब मिल जुल कर रहें ।

नफरत, लड़ाई झगड़े ,युद्ध, आतंकवाद छोड़ कर आपस में प्यार बांटे यह प्यार वीजा, देश की सीमाओं का मोहताज ना हो ,और प्यार शांति चारो ओर बिखरे हर ओर खुशहाली हो, सब चैन से रहें,प्यार विश्व के सब देशों को वीजा पासपोर्ट बंद कर देने चाहिए , हर कोई पूरे विश्व का नागरिक हो पूरी धरती पर बिना रोक टोक आ जा सके।

लेखक यह विश्व प्रेम का सिलसिला खुद से सुरु करना चाहता है, लेखक चाहता है वह हर किसी के काम आए , कर किसी के कल्चर भाषा धर्म को समझे और आदर करें।

लेखक यह सब बहुत तेजी से करना चाहता है क्यों कि उम्र बहुत छोटी होती है उसी उमर में पर विश्व के कल्चर दिखने समझने हैं। सबको अपना बनाना है , विश्व शांति लाना है।

लेखक के स्वभाव में अपना पन, प्यार ,हमदर्दी ,परोपकार ,दया, करुणा आदि कूट कूट कर भरा है, यह भावनाएं सब में होती है बस उन्हें याद दिलाना है और जागृत करना है।

 यह काम बड़े बड़े विश्व नेता बहुत आसानी से कर सकते हैं। लेखक सोचता है वो बहुत छोटा है मगर सोचता है ,क्यों की भगवान चाहें तो कुछ भी अनहोनी पल में हो सकती है, हो सकता है यह भावनाएं हमारे विश्व नेताओ के मन में भगवान लाए या और कोई चमत्कार जो हम कल्पना भी नहीं कर सकते , भगवान कर सकते हैं।

विश्व शांति के काम में लेखक सबसे सहयोग करना चाहता और बढ़ चढ़ कर इस काम में हिस्सा लेना चाहता है, लेखक चाहता है जैसे श्री कृष्ण भगवान एक ही समय में करोड़ो गोपियों के साथ होते थे और हर के मन की मुराद पूरी करते थे, ऐसा ही कुछ विश्व शांति और प्यार के आदान प्रदान  में हो।

सारे विश्व के लोग एक पल में ही एक दूसरे के दिल में बस जाए कि कभी कोई लड़ाई झगड़े की कल्पना भी न करे और पूरे विश्व के सब हथियार नष्ट कर दिए जाएं , सेनाओं की कोई जरूरत ना हों।

पूरे विश्व में सब मिल बांट कर खाए पिए खुशियां मनाएं , कोई गरीब ना हो,तो यह पृथ्वी ही स्वर्ग है।

" मेरे बारे में" कविता में लेखक के विश्व शांति भाईचारे के विचार हैं, भगवान जरूर इसे पूरा करेगा।

कृपया कविता को पढ़े और शेयर करें।

... इति...

_जे पी एस बी

jpsb.blogspot.com


 

Wednesday, July 7, 2010

जिंदगी और मौत ( Jindgi Aur Mout)



Life N death
Life N Death
Image from :pexels.com

 जिंदगी और मौत दो सगी बहनें है...

जिनका एक दूजे बिन इनका गुजारा नहीं...

जितनी सच जिंदगी है....

 मौत भी उतनी ही हकीकत है...

           जिंदगी है तब ही मौत है ...

         मौत है इसलिए जिंदगी है... 

 

जिंदगी एक सुंदर आगाज़ है...

तो मौत उसका खूबसूरत अंत है...

मौत के बिना जिंदगी अधूरी है...

जिंदगी एक सुहाना सफ़र है...

तो मौत एक सफल मंजिल है...

 

इसी मंजिल की  ..

तलाश में तो जिंदगी निकली है...

और मौत पूरी वफा से ...

जिंदगी को मिलती है...

जहा जहा जिंदगी है...

मौत भी वहा पास खड़ी है...

 

जिंदगी छोटी और मौत बड़ी है...

जिंदगी और मौत एक दूजे का पर्याय है ..

चलो जी ले जिंदगी ...

मौत को गले लगाने के लिए...!! 


Jindgi aur mout do sagi bahane hai..

Jinka ek duje ke bina gujara nahi hai..

Jitani sach jindagi hai ..

Mout bhi utni hi  hakikat hai..

Jindgi hai tab hi mout hai..

Mout  hai isaliye jindgi hai..


Jindgi ek sunder aagaj hai..

Tou mout uska khubsurat ant..

Mout ke bina jindgi adhuri hai..

Jindgi ek suhana safar hai..

Tou mout ek safal manjil hai..


Isi manjil ki ..

Talash me tou jindgi nikali hai ..

Aur mout puri vafa se..

 Jindgi ko milti hai..

Jahan Jahan jingi hai..

Mout bhi wahi pas khadi hai..


Jindgi chhoti hai aur mout badi hai..

Jindgi aur mout ek duje ke pray hai..

Chalo ji le jindgi bharpur ..

Mout ko gale lagane ke liye ..!!


_जे पी एस बी 

कविता की विवेचना: 

जिंदगी और मौत/Life N Death कविता जिंदगी और मौत के आपसी रिलेशन के बारे में है, जिंदगी ना होती तो मौत बिना होती, जिंदगी है इसलिए तो मौत है।

जिंदगी और मौत एक दूसरे की परसायियो की तरह है जो कभी भी दूजे का साथ नही छोड़ती। 

दोनो सगी बहिने हैं, जहा जिंदगी सुरु होती है मौत जिंदगी के पीछे पीछे परसाई की तरह चलती है, और जहा जिन्दगी थमी,और मौत उसका बैटन पकड़ आगे के सफर के लिए चल देती है मंजिल की ओर ,जबकि यह किसी को पता नही मौत के सिवा की मंजिल कहां है।

मौत हमेशा जिंदगी का साथ देती है , जैसे ही जिंदगी अंतिम सांस लेती है , मौत तुरंत ही हांथ थाम लेती है।

ज़िंदगी अधर में साथ छोड़ देती ,मौत अपना लेती है और कभी छोड़ कर नही जाती बल्कि साथ ले जाती है सदा के लिए।

इसलिए तो जिंदगी बेवफा है बीच रास्ते छोड़ जायेगी , मौत महबूबा है साथ लेकर जायेगी और अनंत तक साथ निभायेगी।

फिर भी जिंदगी से प्यार और मौत से इंसान डरता क्यों है जब की यह पूर्ण सत्य है जिंदगी जायेगी ही उतना ही उतना ही सत्य यह भी है कि मौत आएगी ही I

मौत से भी डर के बजाय प्यार करना चाहिए क्यों कि अंत में उसके साथ ही जाना है,इसलिए मौत से भी प्यार रहना चाहिए उतना ही जितना जिंदगी से इंसान करता है।

"जिंदगी और मौत" कविता में ज़िंदगी और मौत को एक दूसरे के पूरक के रूप में देखा गया है, एक दूजे के बिना दोनो का ही अस्तित्व नही है , जिंदगी है तो मौत है, जिंदगी नही तो मौत भी नही है।

कृपया कविता को पढ़े और शेयर करें।

... इति...

_ जे पी एस बी 

jpsb.blogspot.com

 

 

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