Sunday, September 13, 2026

हम दो हवायें (Hum do hawaye)


हम दो हवायें-असीम प्यार की कविता 
Great Love -Poem
    
Hum do hawaye
Hum do hawaye
Image Created by:GemineAI 
     
हम दो हवायें..
मिल गाएँ..
नदिया से दरिया..
दरिया से सागर..
सागर दे पैगाम..
हम रूहें हैं..
प्यार की..
एक दूजे में समाहित..

आत्मा होना भाया..
पवित्र संपूर्ण प्यार..
हममें सदियों से समाया..
ब्रह्मांड हमारा घर..
कितना प्यारा है..
यही संसार हमारा है..
परमात्मा ने दुलारा है..

चाह नहीं हमें..
जन्म लेने की..
अमर अजर है हम..
फिर क्यों जन्मे..
हो अलग अलग..
शरीरों में बांटे जाये..
फिर एक होने की..
कसमें खाये..

फ़िर हो जायेगा..
दायरा सीमित..
एक उम्र और खत्म..
फिर आत्मा ही सत्य है..
फिर इस सत्य से..
क्यों दूर जाना..
ना कोई देश की सीमा..
ना किसी ग्रह की..
ना चिंता विरह की..

आज जानी जान है..
एक दूजे पे कुर्बान हैं..
एक हैं जैसे..
जल की धारा..
विज्ञान कहता है..
जल नहीं दो हवायें..
जो मिली फिर..
एक दूजे में समाहित..
फिर जल बन जाये..

इसमें ही हमें आनंद है..
गहरा सागर अथाह..
नील गगन और..
उसमें उड़ते बादल..
हवा का साथ है..
समझ से परे..
किसी इंसान के..
हवा पानी बादल वर्षा..
अलग अलग हैं..
कि एक ही बात है..

चाह में ही राह..
प्यार की वर्षा ..
सब बंधनों से मुक्त..
एक दूजे में प्रयुक्त..
आत्मा में परमात्मा ..
फिर फिर क्यों..
इंसान बनना..
अपने आप को..
सिद्ध करना एक हो..
प्यार को प्रसिद्ध करना..

एक दूजे में खोए खोए ..
जागते में सोये सोये..
ख़्वाबों के मसीहा..
हममें प्यार का..
अथाह सुख लिया..
ना उम्र की चिंता..
ना जन्मों का बन्धन..
हम हैं अमर..
हमारा प्यार अमर ..
गवाह खुदा..

ना भूख प्यास..
ना किसी की आस..
सब कुछ है अपने पास..
रूहों का जीवन..
अनोखा है..
आत्मा को परमात्मा से ..
मिलने का मौका है..
ब्रह्मांड का नहीं राज..
हमारा घर है आज..

ज्ञान विज्ञान से आगे ..
सब कुछ ज्ञात है..
ब्रह्मांड अनन्त..
उसमें जन्नत..
स्वर्ग नरक..
इंसानो का ज्ञान ..
हर जगह भगवान..
प्यार का वरदान..
हम आत्माओं को..
प्राप्त है..


​अनंत काल की यात्रा ..
हम एक ही रहेंगे अनंत..
न जिस्म न हम काया ..
हमने सब कुछ पाया..
समय, सृष्टि और शून्य ..
कोई नहीं बन्धन..
प्यार हमारा अमर..
रूहों का अनोखा संगम ..!!

Jpsb blog 

कविता की विवेचना:-

​"हम दो हवायें "(Hum do hawaye)कविता आत्मा, प्रेम और ब्रह्मांडीय चेतना का एक अत्यंत सुंदर और दार्शनिक संगम है।

 कवि ने भौतिक शरीर और सांसारिक बंधनों से परे जाकर प्रेम को रूहानी और अमर रूप में स्वीकार किया है। कविता की शुरुआत "दो हवाओं" के रूपक से होती है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से जल का बनना) और आध्यात्मिक संगम दोनों को एक साथ दर्शाती है।

​कवि सांसारिक सीमाओं, जन्म-मरण के चक्र, और सामाजिक दायरों पर प्रश्न उठाता है। जब प्रेम दो आत्माओं का सत्य है, तो फिर भौतिक शरीर धारण करके विरह और सीमाओं का दुख क्यों सहना? 

कविता में हवा, पानी, बादल और वर्षा के माध्यम से प्रकृति और रूह के अटूट संबंध को दर्शाया गया है ऑक्सिजन हायड्रोजन का मिलन पानी वर्षा बादल पानी हवा के चक्र को दर्शाता अटूट बन्धन है l 
यह प्रेम किसी मानवीय समझ, उम्र या जन्मों के बंधन में नहीं बंधा है, बल्कि यह परमात्मा की कृपा और ब्रह्मांड की अनंतता में समाया हुआ है।

 कवि ने बड़ी सहजता से यह संदेश दिया है कि सच्चा प्रेम भौतिक आकर्षण न होकर आत्मा का परमात्मा में और एक रूह का दूसरी रूह में विलय है, जो अजर-अमर है।

​कवि का उद्देश्य:-

​"हम दो हवायें "कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य पाठक को सांसारिक और क्षणभंगुर प्रेम से ऊपर उठाकर 'रूहानी और शाश्वत प्रेम' की अनुभूति कराना है। 

कवि समाज द्वारा प्रेम पर थोपी गई सीमाओं, देह के मोह और भौतिकवादी सोच पर चोट करना चाहता है। वह यह समझाना चाहता है कि प्रेम का वास्तविक आनंद और पूर्णता शरीर धारण करने में नहीं, बल्कि आत्माओं के एकत्व में है।

​प्रकृति और विज्ञान के उदाहरणों द्वारा कवि यह सिद्ध करता है कि सच्चा प्यार मुक्‍त, असीम और ईश्वर का ही एक रूप है।

 कवि का ध्येय मनुष्य को यह अहसास कराना है कि आत्मा अमर है और जब प्रेम आत्मिक स्तर पर होता है, तो वह भय, विरह और मृत्यु से मुक्त होकर स्वयं ब्रह्मांड बन जाता है।

जिस्म ढल जाते हैं, मगर रूहें सदा मुस्कुराती हैं
अमर प्रेम की धाराएं, ब्रह्मांड में समाती हैं।

...इति 

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Author is a member of SWA Mumbai. Copyright of poem is reserved .

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